
बिना बेस ढलाई के बन रही किचन बिल्डिंग, घटिया निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से ग्रामीणों में आक्रोश…! सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता प्रतापपुर:– केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय योजना अब प्रतापपुर में गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों की बच्चियों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस बहुचर्चित योजना के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर निर्माण कराया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई. के बजाय मौन बने हुए हैं।


प्रतापपुर विकासखंड के सरनापारा में लगभग 38 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन एकलव्य विद्यालय परिसर में किचन भवन निर्माण को लेकर सबसे गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि भवन में नीचे बेस ढलाई किए बिना ही ऊपर सेंटरिंग कर सीधे ढलाई का कार्य कराया जा रहा है। तकनीकी मानकों के अनुसार जहां ढलाई जाली की दूरी लगभग 6 इंच होनी चाहिए, वहां 9 से 10 इंच की दूरी पर जाली बांधने की बात कही जा रही है। वहीं निर्माण में केवल 8 एमएम सरियों के इस्तेमाल को भी भवन की मजबूती के लिए बेहद कमजोर बताया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि भारी ढलाई कार्य के दौरान मजबूत लोहे के सपोर्ट सिस्टम की जगह बांस और लकड़ी के सहारे सेंटरिंग की जा रही है। इसे सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर किसी जिम्मेदार इंजीनियर की नियमित मौजूदगी नहीं रहती और मजदूरों से बिना तकनीकी निगरानी के कार्य कराया जा रहा है।

निर्माण स्थल पर काम कर रहे श्रमिकों के पास हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का अभाव भी बताया जा रहा है, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार जैसे ही मीडिया की टीम निर्माण स्थल पर पहुंची, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ समय के लिए ढलाई कार्य रोक दिया गया और मजदूरों को इधर-उधर कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों का संदेह और गहरा हो गया कि निर्माण कार्य में गंभीर गड़बड़ी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग करने, प्लास्टर में सीमेंट की मात्रा कम रखने और अवैध रेत के इस्तेमाल जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों और तकनीकी खामियों के बावजूद प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किया जाना कई सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि यदि किसी सामान्य निर्माण कार्य में इतनी शिकायतें सामने आतीं तो अब तक निर्माण रोक दिया जाता, लेकिन यहां करोड़ों रुपये की परियोजना होने के बावजूद काम लगातार जारी है।
आदिवासी बच्चियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय योजना का उद्देश्य दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों की बच्चियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि विद्यालय भवन का निर्माण ही कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा, तो यह सीधे तौर पर छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
जानकारी के अनुसार एकलव्य विद्यालयों के निर्माण पर औसतन 37.8 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाते हैं, जबकि दुर्गम क्षेत्रों में यह लागत 48 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। इसके अलावा विद्यार्थियों की शिक्षा, भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए अलग से राशि स्वीकृत होती है। ऐसे में निर्माण गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल पूरी योजना की विश्वसनीयता पर भी असर डाल रहे हैं।
स्थानीय लोग सरनापारा स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पुराने हादसे का हवाला देते हुए आशंका जता रहे हैं कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। कुछ वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से बने क्वार्टर नंबर 6 की छत से अचानक प्लास्टर गिर गया था, जिसमें एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उस समय भी निर्माण में घटिया सामग्री और अधिकारियों-ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप लगे थे।
अब उसी क्षेत्र में निर्माणाधीन एकलव्य विद्यालय में भी वैसी ही अनियमितताएं सामने आने से लोगों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ साल पुराने भवन की यह स्थिति हो सकती है, तो बिना सुरक्षा मानकों के बनाए जा रहे विद्यालय का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से निर्माण की गुणवत्ता जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार, इंजीनियर तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
एसडीएम ने दिए जांच के संकेत
इस मामले में एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि पूर्व में निर्माण कार्य में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर जांच टीम गठित कर निरीक्षण कराया गया था, जिसमें कई तकनीकी खामियां सामने आई थीं। जांच प्रतिवेदन जिला स्तर पर भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि अब पुनः मीडिया के माध्यम से निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी और घटिया निर्माण की जानकारी मिली है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वे स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगी तथा पूरी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन करोड़ों रुपये की इस परियोजना में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर आदिवासी बच्चियों के भविष्य से जुड़ा यह मामला भी भ्रष्टाचार की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Author: SNT NEWS
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