




भैयाथान जनपद में तिमाही बैठकों पर सवाल, उपस्थिति रजिस्टर ने बढ़ाई हलचल
नियम एक, अमल दूसरा, तिमाही बैठकें क्यों नहीं हो रहीं समय पर?
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता
भैयाथान:–जनपद पंचायत भैयाथान में सामान्य सभा बैठकों की नियमितता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में कम से कम एक बैठक आयोजित किया जाना अनिवार्य है और दो बैठकों के बीच का अंतर तीन माह से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2025 में केवल तीन बैठकें आयोजित हुईं, जबकि वर्ष 2026 में अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है। 2025 की अंतिम बैठक के बाद करीब सात माह का अंतराल बीत जाना नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सूचना के अधिकार के तहत दिए गए आधिकारिक जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी बैठक में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के स्थान पर अन्य किसी व्यक्ति को शामिल नहीं होने दिया गया और न ही किसी को प्रतिनिधि के रूप में बैठने की अनुमति दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि ऐसा करने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।
हालांकि, दूसरी ओर विभिन्न माध्यमों से सामने आए फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट एक अलग ही स्थिति की ओर संकेत करते हैं, जहां कुछ लोग स्वयं को बैठक में उपस्थित बताकर गतिविधियों में भागीदारी का दावा करते नजर आते हैं।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उपस्थिति रजिस्टर को लेकर सामने आया है। यदि बैठकों में केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही उपस्थित थे, तो उपस्थिति पंजी में दर्ज हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कुछ जनप्रतिनिधि शपथ ग्रहण के बाद से अब तक किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए, इसके बावजूद उनके नाम से उपस्थिति दर्ज दिखाई दे रही है। ऐसे में यह प्रश्न और महत्वपूर्ण हो जाता है कि संबंधित हस्ताक्षर वास्तव में किसके द्वारा किए गए।
उपलब्ध तथ्यों और दावों के बीच अंतर को देखते हुए अब बैठकों से जुड़े सभी अभिलेखों जैसे उपस्थिति पंजी, कार्यवाही विवरण, फोटो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग तथा सभाकक्ष के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है।
जानकारों का मानना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं, तो इन रिकॉर्ड्स को सामने लाने में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।
पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस को तेज कर दिया है। एक ओर आधिकारिक जवाब है, तो दूसरी ओर सामने आ रहे दृश्य प्रमाण—दोनों के बीच का अंतर अब स्पष्टता की मांग कर रहा है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी इन सवालों का क्या जवाब देते हैं और क्या वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।















