

सरकारी व वन भूमि पर अवैध कब्जा, पीएम आवास योजना के नाम पर गंभीर अनियमितता
सारासोर मंदिर परिसर से लगे क्षेत्र में अतिक्रमण की पुष्टि, तहसीलदार की मौजूदगी में हुआ सीमांकन
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता /भटगांव:– जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत पहाड़ा अमोरनी अंतर्गत ग्राम सारासोर में स्थित प्राचीन सारासोर मंदिर परिसर से लगी शासकीय एवं वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जे और निर्माण का मामला अब प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। न्यायालय नायब तहसीलदार भटगांव के आदेश पर गठित जांच दल द्वारा मौके पर पहुंचकर सीमांकन एवं पंचनामा की कार्रवाई की गई, जिसमें सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की स्पष्ट पुष्टि हुई है।
ग्रामीणों एवं ग्राम पंचायत द्वारा लंबे समय से शिकायत की जा रही थी कि मंदिर परिसर से लगी शासकीय व वन भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से मकान निर्माण किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने तहसील प्रशासन को जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

*तहसीलदार की मौजूदगी में हुई जांच, अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण*
न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 05 जनवरी 2026 को गठित जांच दल ने ग्राम सारासोर पहुंचकर स्थल निरीक्षण, सीमांकन एवं पंचनामा की कार्रवाई की। इस दौरान—
शिवनारायण राठिया, तहसीलदार, भटगांव
धनसाय नागेश, राजस्व निरीक्षक, भटगांव
हिराचन सिंह, पटवारी, हल्का नंबर 25
प्रतिमा मार्कण्डे, पटवारी, हल्का नंबर 24
नरेंद्र बखला, पटवारी, हल्का नंबर 26
शारदा नाग, पटवारी, हल्का नंबर 30
सुमन धर दुबे, पटवारी, हल्का नंबर 23
मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में शासकीय भूमि का सीमांकन किया गया और मौके पर ही पंचनामा तैयार किया गया।
*पंचनामा में अवैध निर्माण की पुष्टि*
जांच के दौरान खसरा नंबर 867, 863, 864 सहित अन्य शासकीय भूमि पर 10×6 मीटर, 11×5 मीटर एवं 6×6 मीटर क्षेत्रफल में पक्के व कच्चे मकानों का निर्माण पाया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 50×20 मीटर क्षेत्र में भूमि समतलीकरण कर कब्जे की तैयारी भी सामने आई।
सीमांकन उपरांत पंचनामा तैयार कर उपस्थित ग्रामीणों एवं संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर लिए गए, जिससे अतिक्रमण की स्थिति आधिकारिक रूप से दर्ज हो गई।
प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर बड़ा सवाल
सूत्रों के अनुसार विवादित क्षेत्र में लगभग 10 प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकानों का निर्माण किया गया है। जबकि योजना के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास का लाभ केवल वैध निजी अथवा आबादी भूमि पर ही दिया जा सकता है। शासकीय अथवा वन भूमि पर बिना वैधानिक स्वामित्व के आवास स्वीकृत किया जाना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि यदि भूमि सरकारी थी, तो भूमि सत्यापन किस आधार पर किया गया? जियो-टैगिंग और स्वीकृति किन दस्तावेजों पर दी गई? भुगतान जारी करने से पहले आपत्तियों को क्यों नजरअंदाज किया गया?

सैकड़ों ग्रामीण और मां सतलोकी देवी ट्रस्ट की उपस्थिति
जांच और सीमांकन के दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर उपस्थित रहे। साथ ही मां सतलोकी देवी ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। ट्रस्ट पदाधिकारियों एवं ग्रामीणों का कहना है कि सारासोर मंदिर वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है और मंदिर परिसर से लगी भूमि पर अतिक्रमण से धार्मिक, सामाजिक और सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहे हैं।
*अब सबसे बड़ा सवाल — कार्रवाई कब?
अब जबकि न्यायालय के आदेश पर सीमांकन और जांच पूरी हो चुकी है, पंचनामा में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि दर्ज है,
और प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर अनियमितता सामने आई है, तो सवाल उठता है क्या अवैध अतिक्रमण हटाया जाएगा?
क्या सरकारी भूमि पर पीएम आवास बनवाने वाले अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई होगी?
क्या योजना को स्वीकृति देने वाले कर्मचारी और अधिकारी भी जवाबदेह ठहराए जाएंगे?
प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जांच दल द्वारा तैयार विस्तृत प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना है। इसके बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर पूरे क्षेत्र की नजर टिकी हुई है। यह मामला अब केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि सरकारी भूमि, धार्मिक स्थल और प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।

Author: SNT NEWS
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