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वन विभाग सो रहा है कुंभकर्णी नींद, जंगलों पर अतिक्रमण का खेल जारी

वन विभाग सो रहा है कुंभकर्णी नींद, जंगलों पर अतिक्रमण का खेल जारी

क्या जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत से हो रहा है जंगल का सौदा ?
हैरी पॉटर राजेश गुप्ता भटगांव सलका
भटगांव/ प्रतापपुर:– सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। एक तरफ जंगली हाथियों का आतंक ग्रामीणों की जान ले रहा है, वहीं दूसरी ओर जंगलों पर खुलेआम अतिक्रमण का खेल चल रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग की आंखों के सामने हो रही इस लूट पर विभाग चुप क्यों है? क्या अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है?

हाथियों का आतंक और अतिक्रमण का खेल, जंगल दोहरी मार झेल रहा है

प्रतापपुर परिक्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। कई लोग इनकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन इन मौतों से सबक लेने के बजाय विभाग का ध्यान जंगल बचाने पर भी नहीं है। धरमपुर रेंज के तहत आने वाले ग्राम बगड़ा और पलढा में जंगलों पर धड़ल्ले से कब्जा हो रहा है। जेसीबी मशीनें लगाकर खेत बनाए जा रहे हैं, पेड़ों को काटा जा रहा है और यह सब किसी चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम हो रहा है।

ग्रामीणों की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं

स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत वन विभाग से की है। रेंजर को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। सवाल उठता है कि विभाग आखिर किस दबाव में है? या फिर यह दबाव नहीं, बल्कि संरक्षण है?

उत्तम मिश्रा के कार्यभार के बाद बिगड़े हालात

ग्रामीणों का कहना है कि जब से उत्तम मिश्रा ने वन परिक्षेत्र अधिकारी का पद संभाला है, तब से स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। पहले जहां विभाग की ओर से थोड़ी बहुत सक्रियता दिखती थी, वहीं अब जंगलों में जेसीबी चलाना आम बात हो गई है। विभाग की चुप्पी इस ओर इशारा करती है कि कहीं न कहीं अंदरूनी मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं।

जंगल का भविष्य खतरे में

अतिक्रमणकारियों का हौसला इतना बुलंद है कि वे दिनदहाड़े मशीनों से जंगल को खोद रहे हैं। यदि यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, तो आने वाले समय में जंगल का नामोनिशान मिट जाएगा और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

सवाल जिनका जवाब चाहिए

आखिर वन विभाग कब जागेगा? क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव है? हाथियों का आतंक और अतिक्रमण, इन दोनों पर एक साथ नियंत्रण कौन करेगा? क्या शासन-प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेगा या फिर जंगल सिर्फ कागजों में ही बचेंगे?

Shaif firdousi
Author: Shaif firdousi

KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !

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