
Lundra: Earnings made during Sushasan Tihaar remained unheard, no action was taken on the demand of SDO’s table
Highlights “प्रशासन ने माना मुद्दा गंभीर, पर समाधान नहीं । “जवाब में जवाबदेही नहीं!”
शिकायत सुनी… पर अनसुनी सी!”

लुण्ड्रा, सरगुजा। सुशासन तिहार, जो शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है, इस बार केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। पत्रकार शैफ फिरदौसी द्वारा RES विभाग में पदस्थ SDO धनेश्वरी टोप्पो के खिलाफ की गई शिकायत पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई ।
धनेश्वरी टोप्पो एक ही जनपद में वर्षों से पदस्थ हैं, और एक दशक से अधिक समय हो चुका है। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शैफ फिरदौसी ने उनका स्थानांतरण करने की मांग की थी।
प्रशासन ने चुप्पी साधी
हालांकि, इस गंभीर मुद्दे को सुशासन तिहार जैसे मंच पर उठाने के बावजूद प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। न तो शिकायत का जवाब दिया गया और न ही कोई कदम उठाया गया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सुशासन तिहार केवल एक दिखावा बनकर रह गया है?

जनता अब यह जानना चाहती है कि जिन मंचों को सरकार ने जवाबदेही के लिए बनाया है, वहां उठी आवाजें भी अगर अनसुनी रह जाएं, तो न्याय की उम्मीद आखिर किससे की जाए?
सुशासन तिहार के जवाब में कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवाएं सरगुजा संभाग लिखते हैं ।
जवाब मिला – ‘स्थानांतरण पर फिलहाल रोक है।’
तो क्या सुशासन तिहार का मतलब है सिर्फ जवाब टालना?
या फिर यह जनता की आवाज़ को अनसुना करना?
अब सवाल उठता है – क्या यही है “सुशासन” का असली चेहरा?
Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









