
बलरामपुर में गरीबों का राशन अब पेट भरने नहीं, पैसे बनाने का ज़रिया बन गया!
बलरामपुर, छत्तीसगढ़ ! VIJAY SINGH
पहले पेट भरने के लिए राशन मिलता था, अब जेब भरने के लिए राशन बेचा जाता है।
बलरामपुर जिले की सरकारी राशन दुकानों से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहाँ राशन हितग्राही अब सरकारी चावल, और शक्कर घर ले जाने के बजाय सीधे दुकानदार के पास ले जाकर बेच देते हैं — और बदले में कैश ले लेते हैं।
राशन की दुकान से निकले… और फिर लौटे पैसे लेके!
जैसे ही हितग्राही राशन लेकर दुकान से बाहर निकलते हैं, वे सीधे पास में खुले स्थानीय किराना दुकानदारों के पास पहुंच जाते हैं — जहाँ उन्हें उस राशन के बदले में नकद पैसे थमा दिए जाते हैं।

यह अब एक खुला खेल बन चुका है।
न कोई डर, न शर्म — राशन की बिक्री सार्वजनिक रूप से हो रही है।
शासन लापरवाही व्यापार का अड्डा ?
सरकार ने यह योजना गरीबों को भूख से राहत देने के लिए शुरू की थी। लेकिन आज ये योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का धंधा बन गई है।
हितग्राही कहते हैं —
“राशन की हमें जरूरत नहीं, पैसे ज़्यादा ज़रूरी हैं…”
दुकानदारों के लिए —
“सस्ते दामों में माल मिल रहा है, तो क्यों न खरीदा जाए?”
समस्या केवल हितग्राहियों की नहीं — मिलीभगत गहरी है !
इस पूरे खेल में दुकानदार, हितग्राही और कुछ अधिकारियों की लापरवाही की आशंका है।
अगर अधिकारी ईमानदारी से निगरानी करें, तो यह बंद हो सकता है। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
समाधान क्या है?
जो हितग्राही राशन बेचते पकड़े जाएं, उनका कार्ड रद्द हो।
खरीदने वाले दुकानदारों पर एफआईआर हो।
नियमित जांच और निगरानी टीम सक्रिय की जाए।
डिजिटल सिस्टम से ट्रैकिंग और फिंगरप्रिंट ऑडिट हो।
क्या पीडीएस अब भी गरीब का सहारा है या कुछ लोगों की कमाई का ज़रिया बन चुका है?
राशन केवल उन्हीं तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में इसकी ज़रूरत है।

Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









