
[स्थान: सरगुजा, छत्तीसगढ़] [संपादकीय]
संपादक शैफ फ़िरदौसी- आज जब देश आधुनिकता की बात कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग का अन्नदाता दोहरे संकट की चक्की में पिस रहा है। एक तरफ आसमान छूते डीजल-पेट्रोल के दाम और उनकी किल्लत ने खेती की रफ्तार रोक दी है, तो दूसरी तरफ खाद की कालाबाजारी ने किसान की कमर तोड़ दी है। यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी की आहट है।

डीजल का ‘ड्राय’ होना और ट्रैक्टरों के थमे पहिए -पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड और प्रति गाड़ी ₹500 की लिमिट ने कृषि कार्य को ठप कर दिया है। किसान को अपने ट्रैक्टर के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिल रहा है, जिससे जुताई और बुवाई का गणित बिगड़ गया है। तेल की इस किल्लत ने परिवहन व्यवस्था को भी ध्वस्त कर दिया है।
बड़ी समस्या: डीजल की कमी के कारण मंडियों तक पहुंचने वाली गाड़ियां कम हो गई हैं। इसका सीधा प्रहार टमाटर, खीरा और अन्य हरी सब्जियों जैसे ‘पेरिशेबल गुड्स’ (जल्द खराब होने वाले माल) पर पड़ रहा है। किसान अपना कच्चा माल रोक नहीं सकता और परिवहन न मिलने के कारण उसे औने-पौने दाम पर खेत में ही सड़ने छोड़ना पड़ रहा है।

खाद की किल्लत: ₹1350 का डीएपी ₹2000 में!
सरगुजा की भूमि पर इस वक्त खाद और यूरिया का भीषण अकाल है। सरकारी केंद्रों पर ‘स्टॉक खत्म’ है, जिसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं।
- कालाबाजारी: ₹1350 की सरकारी कीमत वाला डीएपी आज बाजार में ₹1800 से ₹2000 तक बिक रहा है।
- नकली उत्पाद का डर: मांग और आपूर्ति में भारी अंतर के कारण बाजार में नकली और मिलावटी खाद का खतरा बढ़ गया है, जिससे फसल बर्बाद होने का डर और कर्ज का बोझ दोनों बढ़ रहे हैं।
लागत और मुनाफे की खाई: कर्ज के जाल में किसान
हजारों किसानों से जमीनी बातचीत के बाद एक ही दर्द उभर कर सामने आता है— “लागत दुगनी, मुनाफा आधा।” डीजल, खाद और बीज के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन किसान के अनाज और सब्जियों के दाम स्थिर या गिर रहे हैं। जब मांग और आपूर्ति की चेन टूटती है, तो सबसे पहले किसान ही टूटता है। यही वह भयावह स्थिति है जो अंततः किसान को आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदमों की ओर धकेलती है।

जनता पर सीधा असर
यह केवल किसान की समस्या नहीं है। जब खेत से मंडी तक माल नहीं पहुंचेगा, तो शहरों में महंगाई का ग्राफ और ऊपर जाएगा। डीजल की मंदी और खाद की कमी एक ऐसा ‘मायाजाल’ बुन रही है जिसमें आम जनता और किसान दोनों फंसते जा रहे हैं।
निष्कर्ष:
यदि समय रहते सरकार और प्रशासन ने सरगुजा के इन हालातों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा होगा। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना और डीजल की सुचारू सप्लाई आज की सबसे बड़ी जरूरत है। अन्नदाता को सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि उसके पसीने की सही कीमत और संसाधन चाहिए।
— ग्राउंड रिपोर्ट SNT NEWS
Author: SNT NEWS
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