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Lundra – भ्रष्टाचार की ‘सरकारी’ दुकान: जनपद पंचायत के ठीक सामने नियमों को पीसकर पी गए अफसर और ठेकेदार!

भ्रष्टाचार की ‘सरकारी’ दुकान: जनपद पंचायत के ठीक सामने नियमों को पीसकर पी गए अफसर और ठेकेदार!
साहब की नाक के नीचे चल रहा घटिया निर्माण; कंक्रीट में दिख रही ‘हनीकॉम्बिंग’, सरिए में लगी जंग
● नदारद रहा तकनीकी अमला, बिना सूचना बोर्ड के जनता के पैसों की सरेआम बर्बादी
सगुजा SHAIF FIRDOUSI– कहते हैं कि चिराग तले हमेशा अंधेरा होता है, लेकिन जब अंधेरा शासन-प्रशासन की नाक के ठीक नीचे हो, तो समझ जाना चाहिए कि व्यवस्था की आंखें जानबूझकर मूंद ली गई हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला जनपद पंचायत कार्यालय के ठीक सामने देखने को मिला है, जहां बन रही सरकारी दुकानों के निर्माण में खुलेआम धांधली और घटिया स्तर की सामग्री का खेल चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इसी रास्ते से रोजाना जनपद के आला अधिकारी और इंजीनियर गुजरते हैं, लेकिन किसी को भी यह ‘करप्शन’ दिखाई नहीं दे रहा है।
कंक्रीट की ‘हनीकॉम्बिंग’ खोल रही पोल
मौके पर जाकर जब निर्माण कार्य का जायजा लिया गया, तो तकनीकी कमियों की लंबी फेहरिस्त सामने आई। आरसीसी (RCC) कॉलम और बीम की ढलाई इतनी घटिया क्वालिटी की है कि कंक्रीट की गिट्टियां साफ तौर पर बाहर झांक रही हैं। तकनीकी भाषा में इसे ‘हनीकॉम्बिंग’ कहा जाता है, जो तब होती है जब सीमेंट, रेत और गिट्टी का मिश्रण सही अनुपात में न हो या ढलाई के वक्त वाइब्रेटर का इस्तेमाल न किया गया हो। इस लापरवाही के कारण पूरा ढांचा बेहद कमजोर हो चुका है।
जंग लगे सरिए पर टिकी है भविष्य की बुनियाद
इतना ही नहीं, दुकानों के ऊपर भविष्य में होने वाले निर्माण के लिए जो सरिया (Reinforcement Bars) छोड़े गए हैं, वे लंबे समय से खुले आसमान के नीचे पड़े हैं। बारिश और धूप के कारण उनमें पूरी तरह से जंग (Rust) लग चुकी है। नियमानुसार, जंग लगे सरिए पर दोबारा कंक्रीट डालना सीधे तौर पर बिल्डिंग की उम्र को आधा करना है। लेकिन ठेकेदार को सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब है और जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी कमीशनखोरी से!


गायब है सूचना पटल, अंधेरे में जनता
सरकारी निर्माण का पहला नियम होता है कि कार्यस्थल पर एक सूचना बोर्ड लगाया जाए, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, ठेकेदार का नाम और काम पूरे होने की अवधि लिखी हो। लेकिन इस साइट पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं है। अफसर और ठेकेदार मिलकर इस पूरे प्रोजेक्ट को छुपाकर और दबाकर निपटाने की फिराक में हैं, ताकि जनता को बजट का पता ही न चल सके।
इन कड़े सवालों के घेरे में प्रशासन:       

इंजीनियर कहाँ सो रहे हैं? नियम के मुताबिक हर ढलाई के वक्त सब-इंजीनियर (Sub Engineer) का मौके पर होना अनिवार्य है। क्या यह घटिया ढलाई इंजीनियर की मर्जी से हुई है?

नाक के नीचे अंधेरगर्दी क्यों? जनपद पंचायत के ठीक सामने चल रहे इस अवैध और कमजोर निर्माण पर सीईओ (CEO) ने अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया?

क्या अफसरों की मौन सहमति है?
जनता की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन? ये दुकानें कल को छोटे व्यापारियों को आवंटित होंगी। यदि कल को कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी जनपद प्रशासन लेगा?

RES के SDO साहब, यह कैसी इंजीनियरिंग है ?

कंक्रीट की गिट्टियां बिखर रही हैं, सरिया सड़ रहा है, क्या आपकी तकनीकी टीम को यह सब दिखाई नहीं दे रहा? या फिर फाइल पर ‘सब ओके’ कर के एडवांस भुगतान की तैयारी है ?
कमीशन का हिस्सा कहाँ तक जा रहा है? जनपद के ठीक सामने इतनी हिम्मत से घटिया काम करना बिना उच्च स्तरीय प्रशासनिक संरक्षण (Political/Bureaucratic Protection) के मुमकिन नहीं है। इस खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है ?

आधिकारिक वर्जन (Official Version Box)
फोन पर बातचीत के दौरान जनपद सीईओ लुंडरा ने कहा कि “यह बिल्डिंग ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग की देखरेख में बन रही है।  निर्माण कार्य में गुणवत्ता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मैं इस पूरे निर्माण कार्य की जांच कराती हूं।
प्रीति भगत, सीईओ, जनपद पंचायत लूँडरा

संपादकीय नोट:- विभागों की इस खींचतान और लापरवाही में जनता के टैक्स का पैसा सरेआम बर्बाद हो रहा है। ‘सरगुजा न्यूज़ टुडे’ सीईओ प्रीति भगत द्वारा दी गई इस ‘जांच के आश्वासन’ की जमीनी हकीकत पर पैनी नजर बनाए रखेगा। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और भ्रष्ट इंजीनियरों-ठेकेदारों पर गाज नहीं गिरती, हमारी यह मुहिम जारी रहेगी।

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Author: SNT NEWS

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