
सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु की इजाजत 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को Passive Euthanasia की अनुमति
SNT NEWS | राष्ट्रीय खबर
देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। हरीश पिछले 13 सालों से कोमा की हालत में हैं और डॉक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं बची है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में “गरिमा के साथ मरने के अधिकार” का हवाला दिया, जिसे 2018 में मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।
क्या हुआ था हरीश राणा के साथ
हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे और बॉडीबिल्डिंग के शौकीन थे।
20 अगस्त 2013 को वह अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। इस हादसे के बाद से वह अचेत अवस्था में हैं।

13 साल तक इलाज की कोशिश
हरीश के पिता अशोक राणा ने बेटे को बचाने के लिए देश के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराया।
चंडीगढ़ PGI, दिल्ली AIIMS समेत कई निजी अस्पतालों में इलाज के बावजूद डॉक्टरों ने बताया कि उनके ठीक होने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है।
माता-पिता ने ही लगाई गुहार
13 साल तक बेटे की हालत देखने के बाद माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि उनके बेटे को अब और पीड़ा में न रखा जाए।
कोर्ट ने परिवार से बातचीत करने के बाद उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी।
क्या है Passive Euthanasia
पैसिव यूथेनेशिया का मतलब है कि मरीज को जीवित रखने के लिए लगाए गए लाइफ सपोर्ट सिस्टम या कृत्रिम उपचार को हटा दिया जाए, ताकि प्राकृतिक रूप से उसकी मृत्यु हो सके।
यह फैसला देश में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।












