
छत्तीसगढ़ के 26 साल: सरगुजा-बस्तर को मिला क्या? खनिज संपदा का दोहन, बेरोजगारी, आदिवासी अधिकारों की अनदेखी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव!*
*भाजपा-कांग्रेस की सत्ता की आंख-मिचौली में पिस रही जनता, अब छत्तीसगढ़ को तीसरे विकल्प की जरूरत : लव कुमार*
अंबिकापुर । आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रवक्ता लव कुमार दुबे ने छत्तीसगढ़ राज्य के 26वें स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का निर्माण यहां के लोगों के संघर्ष, बलिदान और बेहतर भविष्य के सपनों के साथ हुआ था। लेकिन 26 साल बाद भी यह सवाल खड़ा है कि जिन उम्मीदों के साथ अलग राज्य बना था, वे कितनी पूरी हुईं?
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 18 वर्ष भाजपा और 8 वर्ष कांग्रेस की सरकारें सत्ता में रही हैं। दोनों दलों को बताना चाहिए कि इतने वर्षों के शासन के बाद भी जनता सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों संघर्ष कर रही है?
करोड़ों के राज्योत्सव से ज्यादा जरूरी बेहतर छत्तीसगढ़ का निर्माण
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है, युवा बेरोजगारी से परेशान हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और बिजली का अभाव है, तब करोड़ों रुपये खर्च करके भव्य राज्योत्सव और जिला स्तरीय आयोजन करना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
राज्य स्थापना दिवस सरकारी प्रचार और मंचों की चमक-दमक का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन होना चाहिए। जनता के पैसे का उपयोग उत्सवों के दिखावे के बजाय बेहतर स्कूल, अस्पताल, रोजगार और ग्रामीण विकास पर होना चाहिए। छत्तीसगढ़ की जनता को भव्य आयोजन नहीं, धरातल पर विकास चाहिए।
सरगुजा-बस्तर की संपदा चाहिए, लेकिन यहां के लोगों को अधिकार और सम्मान क्यों नहीं?
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का बड़ा हिस्सा सरगुजा और बस्तर जैसे आदिवासी अंचलों से आता है। जब लोहा चाहिए तो बस्तर याद आता है, जब कोयला और बॉक्साइट चाहिए तो सरगुजा याद आता है, लेकिन विकास, रोजगार और सम्मान देने की बारी आती है तो इन क्षेत्रों की उपेक्षा क्यों होती है?
हसदेव अरण्य सहित सरगुजा के जंगलों में कटाई और खनन गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिन जंगलों से आदिवासियों की आजीविका, संस्कृति और जीवन जुड़ा है, उन्हीं पर संकट खड़ा किया जा रहा है। क्या विकास का मतलब केवल खनन कंपनियों का मुनाफा है? जंगल, जल, जमीन और पर्यावरण का संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?
आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और खनन परियोजनाओं को लेकर ग्राम सभाओं की सहमति और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून की भावना के विपरीत आदिवासियों की आवाज को अनसुना करना उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी है।
*रामगढ़ पर्वत और हसदेव अरण्य की सुरक्षा पर सरकार गंभीर क्यों नहीं?*
लव कुमार दुबे ने कहा कि सरगुजा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान रामगढ़ पर्वत पर दरारों की शिकायतें सामने आना चिंताजनक है। रामगढ़ केवल पहाड़ नहीं, सरगुजा की ऐतिहासिक धरोहर है। इसके संरक्षण में लापरवाही भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकती है।
युवा बेरोजगार, महिलाएं परेशान और गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध है, लेकिन प्रदेश का युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहा है। सरकारी भर्तियों में देरी, रिक्त पदों पर नियुक्तियों की अनिश्चितता और निजी क्षेत्र में सीमित अवसर युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जब प्रदेश के संसाधनों से कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, तो स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार क्यों नहीं मिल रहा?
महिलाओं के सशक्तिकरण के दावों के बावजूद ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की चुनौतियां बनी हुई हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों और सुविधाओं के अभाव के कारण गर्भवती महिलाओं को अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि सम्मान और समान अवसरों की अधिकारिणी बनाया जाना चाहिए।
26 साल बाद भी चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के 40 गांवों में बिजली नहीं!
लव कुमार दुबे ने कहा कि राज्य स्थापना के 26 वर्ष बाद भी भटगांव विधानसभा क्षेत्र के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में लगभग 40 गांवों में बिजली की सुविधा नहीं होना विकास के दावों की पोल खोलता है। एक तरफ डिजिटल इंडिया और आधुनिक भारत की बातें होती हैं, दूसरी तरफ ग्रामीण परिवार बुनियादी बिजली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्या इन गांवों के नागरिकों को विकास का अधिकार नहीं है?
सरगुजा के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें इतनी बदहाल हैं कि एंबुलेंस तक गांवों में नहीं पहुंच पाती। मरीजों को चारपाई और झलंगी में उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों और आवश्यक सुविधाओं की कमी बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। यह स्थिति बताती है कि विकास के सरकारी दावे और ग्रामीण जनता की वास्तविकता में कितना अंतर है।
राज्य अलंकरण में सरगुजा-बस्तर की प्रतिभाओं की उपेक्षा क्यों ?
लव कुमार दुबे ने राज्य अलंकरण समारोह में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरगुजा और बस्तर में साहित्यकार, कलाकार, खिलाड़ी, शिक्षाविद्, समाजसेवी और लोक संस्कृति के संरक्षक नहीं हैं? क्या इन क्षेत्रों में राज्य का गौरव बढ़ाने वाली प्रतिभाओं की कमी है?
जब प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सरगुजा और बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों का इतना बड़ा योगदान है, तो राज्य के सर्वोच्च सम्मानों में यहां की प्रतिभाओं को उचित स्थान क्यों नहीं मिलता? राज्य अलंकरण पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है, इसलिए इसकी चयन प्रक्रिया पारदर्शी और सभी संभागों को उचित प्रतिनिधित्व देने वाली होनी चाहिए। सरगुजा और बस्तर को केवल खनिज संपदा का केंद्र समझना बंद किया जाए।
अब जनता को तीसरे राजनीतिक विकल्प पर विचार करना होगा
अंत में लव कुमार दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष पूरे होने पर हम सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हैं, लेकिन यह भी पूछते हैं कि आखिर कब तक जनता भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की आंख-मिचौली में पिसती रहेगी?
दोनों दलों को लंबे समय तक शासन करने का अवसर मिला, फिर भी युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, महिलाएं बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं, आदिवासी अपने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं और ग्रामीण जनता सड़क, बिजली, शिक्षा तथा स्वास्थ्य के लिए परेशान है।
आम आदमी पार्टी पूरे छत्तीसगढ़ में संगठन को मजबूत करते हुए आगामी चुनाव में जनता के बीच जाएगी और प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ को ऐसा राजनीतिक विकल्प देना है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, सड़क और आम नागरिकों के अधिकार राजनीति की सर्वोच्च प्राथमिकता हों।
छत्तीसगढ़ को उत्सवों की चमक-दमक नहीं, धरातल पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए। राज्य स्थापना दिवस का सबसे बड़ा उत्सव तब होगा, जब हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, हर मरीज को बेहतर इलाज, हर युवा को रोजगार और हर गांव को सड़क-बिजली मिले।
सरगुजा और बस्तर को केवल खनिज संपदा के दोहन का केंद्र बनाकर मत रखिए। ये छत्तीसगढ़ की आत्मा, संस्कृति और पहचान हैं। यहां के लोगों को भी विकास, अधिकार और सम्मान में बराबर की भागीदारी मिलनी चाहिए।
लव कुमार दुबे
प्रदेश प्रवक्ता आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़












