
सीतापुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का एक दिवसीय धरना
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने उठाई नियमितीकरण की मांग, मानदेय 30 हजार करने की मांग
स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक दिवसीय धरना, रैली निकालकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; पूरे ब्लॉक के कार्यकर्ता-सहायिकाएं हुईं शामिल
रुपेश गुप्ता-सीतापुर-सरगुजा छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संयुक्त मंच के बैनर तले मंगलवार को सीतापुर स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक दिवसीय धरना दिया गया। इसमें पूरे ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं शामिल हुईं। धरने के बाद रैली निकालकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि, पदोन्नति, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता सहित अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लंबे समय से विभागीय कार्यों के साथ बच्चों और महिलाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
ये हैं पांच सूत्रीय मांगें

1. नियमितीकरण और मानदेय में वृद्धि: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं को नियमित किया जाए। नियमितीकरण होने तक श्रम कानून के तहत कार्यकर्ताओं को 30 हजार और सहायिकाओं को 25 हजार रुपए मानदेय दिया जाए।
2. पदोन्नति और उम्र की बाध्यता समाप्त हो: सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर तथा कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति देने के साथ उम्र संबंधी बाध्यता समाप्त की जाए।
2. सामाजिक सुरक्षा का लाभ: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को समूह बीमा, पेंशन, ग्रेच्युटी एवं पीएफ की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
3. मृत्यु और सेवानिवृत्ति पर आर्थिक सहायता: कार्यकर्ता या सहायिका की आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ताओं को 5 लाख और सहायिकाओं को 3 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाए।
4. प्रतिवर्ष मानदेय में वृद्धि: मध्यप्रदेश की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष 1000 रुपए की वृद्धि की जाए।
मंच ने शासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निराकरण करने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। विभागीय जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।












