सीतापुर में 70 साल पुराने जर्जर खादी भंडार को गिराने पर विवाद, एसडीएम ने बैठाई जांच

सीतापुर में 70 साल पुराने जर्जर खादी भंडार को गिराने पर विवाद, एसडीएम ने बैठाई जांच

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष की शिकायत पर दो अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी, राजकुमार गुप्ता बोले- समाज के निर्णय के बाद गिराया गया जर्जर भवन
रुपेश गुप्ता —-सीतापुर। नगर में करीब 70 वर्ष पुराने जर्जर खादी भंडार भवन को गिराए जाने को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सीतापुर के अध्यक्ष तिलक राज बेहेरा ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्राची ठाकुर को लिखित शिकायत सौंपकर खादी ग्रामोद्योग विभाग के नाम पर पंजीकृत जर्जर भवन को कथित रूप से गिराने और उस पर कब्जा करने के प्रयास की जांच कराने की मांग की है। शिकायत के बाद एसडीएम प्राची ठाकुर ने मामले की जांच के लिए नायब तहसीलदार उमेश तिवारी और नगर पंचायत के सीएमओ ओम प्रकाश तिवारी को नियुक्त किया है। दोनों अधिकारियों से जल्द जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
वहीं, आरोपों के घेरे में आए राजकुमार गुप्ता ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से जर्जर भवन को नहीं तोड़ा गया, बल्कि समाज के निर्णय के बाद इसे गिराया गया है। इस मामले में जर्जर खादी भंडार भवन के पीछे स्थित कमलापुरी समाज के भवन और वहां आवागमन की समस्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पीछे समाज का भवन, आवागमन में परेशानी का हवाला
मामले के अनुसार, खादी ग्रामोद्योग विभाग का पुराना जर्जर भवन आगे की ओर स्थित था, जबकि इसके पीछे कमलापुरी समाज का भवन है। राजकुमार गुप्ता का कहना है कि पीछे स्थित समाज के भवन में आने-जाने में परेशानी हो रही थी और आगामी दिनों में सामाजिक कार्यक्रम भी होना है। इसी को देखते हुए समाज के निर्णय के बाद जर्जर भवन को गिराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से नहीं की गई है।
राजकुमार गुप्ता ने यह भी दावा किया कि जिस स्थान पर जर्जर भवन बनाया गया था, वह छोटे झाड़ की जमीन है। हालांकि, जमीन की वास्तविक स्थिति, उसके राजस्व अभिलेखों और भवन के स्वामित्व को लेकर आधिकारिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने उठाए सवाल
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष तिलक राज बेहेरा ने अपनी शिकायत में कहा है कि खादी भंडार का जर्जर भवन करीब 70 वर्ष पुराना है और खादी ग्रामोद्योग विभाग के नाम पर पंजीकृत है। उनके अनुसार, यह भवन नगर की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत का हिस्सा है। ऐसे में जर्जर भवन को गिराने या उस पर कब्जा करने की कथित कोशिश की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि खादी ग्रामोद्योग विभाग के जर्जर भवन के पीछे कमलापुरी समाज का भवन होने के कारण क्या पुराने भवन को हटाने का प्रयास किया जा रहा था। वहीं, राजकुमार गुप्ता ने जर्जर भवन गिराए जाने के पीछे आवागमन की परेशानी और समाज के निर्णय को वजह बताया है। दोनों पक्षों के दावों के बीच अब जर्जर भवन और जमीन की वास्तविक स्थिति जांच का विषय बन गई है।


जांच के लिए दो अधिकारी नियुक्त, जल्द मांगी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम प्राची ठाकुर ने नायब तहसीलदार उमेश तिवारी और नगर पंचायत सीएमओ ओम प्रकाश तिवारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों अधिकारियों को मामले की जांच कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
तिलक राज बेहेरा ने एसडीएम से जर्जर भवन और भूमि से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराने तथा खादी ग्रामोद्योग विभाग से भवन गिराने संबंधी अनुमति या आदेश की जानकारी लेने की मांग की है। उन्होंने जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार के अनधिकृत कब्जे पर रोक लगाने की मांग भी की है। शिकायत की प्रतिलिपि सरगुजा कलेक्टर, अंबिकापुर को भी भेजी गई है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
फिलहाल इस मामले में खादी भंडार के जर्जर भवन के स्वामित्व, उसे गिराने की अनुमति, जमीन की राजस्व स्थिति और पीछे स्थित कमलापुरी समाज के भवन तक आवागमन की समस्या जैसे कई बिंदु जांच के दायरे में हैं। एक ओर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर राजकुमार गुप्ता ने आरोपों पर सफाई देते हुए समाज के निर्णय और आवागमन में परेशानी का हवाला दिया है। अब जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई नियमानुसार हुई या नहीं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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