साहब’ निकले बड़े झूठे! बिना फोन घुमाए ही CM हेल्पलाइन पर लिख दिया- “शिकायतकर्ता से बात हो गई”

सरगुजा: सीएम हेल्पलाइन का श्रम विभाग ने उड़ाया मजाक, बिना संपर्क किए ही पोर्टल पर चढ़ा दी ‘फर्जी’ रिपोर्ट
अम्बिकापुर। आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए बनाए गए ‘सीएम हेल्पलाइन’ पोर्टल को सरगुजा जिले के अधिकारी ही पलीता लगाने में जुटे हैं। ताजा मामला श्रम विभाग का है, जहां कार्यालय सहायक श्रमायुक्त ने एक शिकायतकर्ता की समस्या की जांच करने के बजाय, बिना उससे संपर्क किए ही पोर्टल पर मनगढ़ंत और झूठा प्रतिवेदन अपलोड कर दिया। इस मामले ने जिले के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही की पोल खोल कर रख दी है।
क्या है पूरा मामला ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता शैफ फिरदौसी ने सीएम हेल्पलाइन पर (टोकन क्रमांक: WP260900184861) एक शिकायत दर्ज कराई थी। दिनांक 09/09/2026 को दर्ज इस शिकायत में ‘मां कुदरगढ़ी एलुमिना फैक्ट्री, सिलसिला’ में कार्यरत कर्मचारियों एवं श्रमिकों के संबंध में जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की गई थी।
कागजों में कर लिया संपर्क, हकीकत में नहीं आई कोई कॉल
इस शिकायत के निराकरण के लिए कार्यालय सहायक श्रमायुक्त अम्बिकापुर (जिला-सरगुजा) द्वारा 21/09/2026 को पत्र क्रमांक 1513 के तहत एक प्रतिवेदन जारी किया गया। इस सरकारी पत्र में साफ शब्दों में लिखा गया है कि “शिकायतकर्ता शैफ फिरदौसी से संपर्क किया गया”।
जबकि, शिकायतकर्ता का स्पष्ट रूप से कहना है कि विभाग की ओर से उनके पास कोई कॉल नहीं आई और किसी भी अधिकारी ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। बंद कमरों में बैठकर ही अधिकारियों ने यह झूठी रिपोर्ट तैयार कर ली और सीएम हेल्पलाइन पर समाधान के रूप में दर्ज कर दिया।

रेण्डम निरीक्षण’ का बहाना बनाकर झाड़ा पल्ला
श्रम विभाग ने न केवल झूठा प्रतिवेदन लगाया, बल्कि जमीनी कार्रवाई से भी कन्नी काट ली है। जारी किए गए प्रतिवेदन में अधिकारी ने लिखा है कि “वर्तमान में रेण्डम निरीक्षण प्रणाली लागू है, अतः मुख्यालय द्वारा रेण्डम निरीक्षण का आदेश प्राप्त होने पर संबंधित संस्थान का नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्यवाही किया जावेगा”। यानी जब तक ऊपर से आदेश नहीं आएगा, विभाग स्थानीय स्तर पर कोई जांच नहीं करेगा।
अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से उठे सवाल
मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी वाले पोर्टल पर इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मचना तय है। बड़ा सवाल यह है कि जो अधिकारी शिकायतकर्ता से बात किए बिना ही ‘संपर्क कर लिया गया’ की झूठी रिपोर्ट शासन को भेज सकते हैं, क्या उनसे पारदर्शी जांच की उम्मीद की जा सकती है ?

जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की जाए और यदि जांच में शिकायत के निराकरण में तथ्यात्मक गड़बड़ी, गलत जानकारी अथवा विभागीय कार्य में लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है -कि मामले की निष्पक्षसाथ ही शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि शिकायत के निराकरण में कथित तौर पर गलत जानकारी दर्ज किए जाने और विभागीय कार्य में लापरवाही बरते जाने के संबंध में उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।

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Shaif firdousi

KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !

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