
₹7.66 करोड़ की सड़क पर उठे सवाल, निर्माण शुरू होते ही खुलने लगीं खामियां
आजादी के बाद मिली पक्की सड़क की सौगात पर गुणवत्ता का ग्रहण? बिना सीमांकन और सूचना बोर्ड के काम शुरू करने का आरोप, कमजोर बेस-जल निकासी से लेकर सड़क के बीच बिजली खंभों तक ग्रामीणों ने उठाई आपत्ति
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता सुरजपुर भैयाथान:-– आजादी के दशकों बाद ग्राम पंचायत खैरी के परसापारा और पंडोपारा के ग्रामीणों को मिली पक्की सड़क की उम्मीद निर्माण शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गई है। शासन द्वारा डामरीकरण सड़क के लिए ₹7 करोड़ 66 लाख की स्वीकृति मिलने के बाद ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के शुरुआती दौर में ही गुणवत्ता, तकनीकी प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण एजेंसी पर कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सड़क का विधिवत सीमांकन नहीं कराया गया। वहीं सड़क की लागत, लंबाई, चौड़ाई और तकनीकी विवरण से संबंधित सूचना बोर्ड भी मौके पर नहीं लगाया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के नाम पर कई स्थानों पर कच्ची दीवारों और अन्य निर्माणों को जेसीबी से हटाया गया, जिससे प्रभावित लोगों में नाराजगी बढ़ी है।

मामले को लेकर भैयाथान के पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सीताराम भास्कर और ग्राम पंचायत खैरी के सरपंच सुबेलाल सिंह की अगुवाई में ग्रामीण जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपी। ग्रामीणों ने तहसीलदार, पटवारी और पुलिस की संयुक्त मौजूदगी में सड़क की नपाई एवं सीमांकन कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण निर्धारित चौड़ाई और स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।
ग्रामीणों के अनुसार परसापारा बस्ती के भीतर कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई करीब 5 से 6 मीटर है, जबकि कुछ हिस्सों में यह 6 से 7 मीटर तक बताई जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि स्वीकृत एस्टीमेट में सड़क की वास्तविक चौड़ाई कितनी निर्धारित है और मौके पर उसी के अनुरूप निर्माण हो रहा है या नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना बोर्ड नहीं होने के कारण आम लोगों को सड़क की स्वीकृत लंबाई, चौड़ाई और लागत जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।
सड़क के किनारों की मजबूती के लिए बनाई जा रही रिटेनिंग वॉल को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जबकि कुछ संवेदनशील स्थानों पर आवश्यकता के बावजूद रिटेनिंग वॉल का निर्माण नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने इसकी तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
निर्माणाधीन सड़क में जल निकासी की व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों की चिंता सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक पर्याप्त ह्यूम पाइप और कल्वर्ट की व्यवस्था नहीं की गई है। हाल की बारिश के बाद सड़क के कई हिस्सों में पानी भरने और बेस धंसने से गड्ढे बनने की बात ग्रामीणों ने कही है। उनका कहना है कि यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही जल निकासी और बेस को लेकर समस्या सामने आ रही है तो डामरीकरण के बाद सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सड़क के बेस में इस्तेमाल किए जा रहे मुरुम और गिट्टी की गुणवत्ता एवं मात्रा को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि शुरुआती चरण में तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई तो भविष्य में सड़क टूटने, दरार पड़ने और बेस खराब होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इसी बीच सड़क की चौड़ाई बढ़ाए जाने के बाद कई हाई-वोल्टेज बिजली के खंभे सड़क के बीच आने की स्थिति में बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद इन खंभों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया है, जिससे आवागमन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने मौके का निरीक्षण किया है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से सड़क निर्माण की तकनीकी जांच, विधिवत सीमांकन तथा स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप निर्माण की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़क क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए निर्माण के शुरुआती चरण में सामने आ रही शिकायतों का समय रहते निराकरण किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो भैयाथान-प्रतापपुर मुख्य मार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक मांगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों द्वारा शिकायत की प्रतियां छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री, लोक निर्माण विभाग मंत्री तथा मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, सरगुजा संभाग अंबिकापुर को भी भेजे जाने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर विभागीय स्तर पर क्या जांच होती है और निर्माण में यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।














