
एसईसीएल भटगांव क्षेत्र में बड़ा हादसा टला
वाह रे सिस्टम…
पुल इतना कमजोर था कि आखिरकार टूट ही गया,
लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी।
देर रात सुखाड़ पुल बीचों-बीच ध्वस्त,
बाल-बाल बचे कई लोग।
अब सवाल — हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन? 🚧
कल देर रात बीचों-बीच टूटा सुखाड़ पुल, आवागमन सहित करोड़ों का कोयला परिवहन ठप्प

सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता भटगांव:-–एसईसीएल भटगांव क्षेत्र अंतर्गत महान-3 जाने वाले जगरनाथपुर-खड़गवां मार्ग पर स्थित सुखाड़ पुल कल देर रात अचानक बीचों-बीच से टूट गया। पुल के ध्वस्त होते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना के बाद आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है, वहीं एसईसीएल का कोयला परिवहन भी ठप्प पड़ गया है, जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना रात लगभग 11 बजे की है। उस समय पुल के दोनों ओर से वाहन गुजर रहे थे। गनीमत रही कि समय रहते वाहन रुक गए और एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कई लोगों की जान जा सकती थी।
स्थानीय ग्रामीणों, मजदूरों और कर्मचारियों ने एसईसीएल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुल लंबे समय से जर्जर हालत में था और बार-बार पुल पर गड्ढे व दरारें उभरती रही थीं। बावजूद इसके स्थायी समाधान या नए पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हर बार केवल मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की जाती रही।
लोगों का आरोप है कि पूर्व में भी इसी पुल पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों की मौत तक हुई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। कार्यवाही के नाम पर केवल लीपापोती होती रही और मजदूरों तथा कर्मचारियों की सुरक्षा को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा।
क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि रोजाना करोड़ों-अरबों रुपये का मुनाफा कमाने वाली कंपनी आखिर कर्मचारियों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर इतनी लापरवाह क्यों रही। मजदूर वर्षों से जान हथेली पर रखकर इस जर्जर पुल से आवाजाही करने को मजबूर थे।
पुल टूटने के बाद महान-3 क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हो गया है। कोयला परिवहन पूरी तरह बंद होने से उत्पादन और सप्लाई पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था और जांच की तैयारी की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।












