
गरीबों को पक्का मकान दिलाने वालों के लिए अपना घर चलाना हुआ मुश्किल
10 माह में लगभग 5 लाख आवास पूर्ण, लेकिन 5 माह से वेतन लंबित
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आवास निर्माण को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। पिछले 10 महीनों में लगभग 5 लाख आवास पूर्ण कर राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत हासिल की गई है, जिसका उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है।
हालांकि इस उपलब्धि के पीछे काम करने वाले जिला एवं जनपद स्तर के अधिकारी-कर्मचारी आज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन में लगे कर्मचारियों का वेतन पिछले लगभग 5 महीनों से लंबित है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार मैदानी स्तर पर आवास स्वीकृति, जियो-टैगिंग, प्रगति मॉनिटरिंग, निरीक्षण और हितग्राहियों से समन्वय जैसे कार्य कर रहे हैं, लेकिन नियमित वेतन न मिलने से उनके सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी चुनौती बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, वेतन भुगतान में कभी फंड की कमी तो कभी एफटीओ (Fund Transfer Order) के रिजेक्ट होने जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे भुगतान प्रक्रिया बार-बार अटक रही है। कर्मचारियों का कहना है कि दीपावली के बाद से वेतन लंबित है और अब होली नजदीक है, फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
कर्मचारियों ने शासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए। उनका कहना है कि राज्य की उपलब्धि में उनका सीधा योगदान है, ऐसे में समय पर वेतन मिलना उनका अधिकार है।
फिलहाल इस मामले में विभागीय स्तर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है, जबकि कर्मचारी शीघ्र समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं।










