
बतौली–बेलकोटा में गुड़ फैक्ट्रियों की गुंडागर्दी फैक्ट्रियों की दबंगई अब गांव वालों के सिर चढ़कर बोल रही है। हर कुछ दिन पर मारपीट, धमकी और भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन आम बात हो चुकी है।
संचालकों की भिड़ंत में सिर फूटा, खून से लथपथ थाना पहुँचा;
दस्तावेजों पर गंभीर संदेह, ग्रामीणों ने दोनों फैक्ट्रियों को सील करने की मांग उठाई
Editor in chief shaif firdousi
सरगुजा जिले के बतौली क्षेत्र के बेलकोटा की दो निजी गुड़ फैक्ट्रियाँ—श्रीराम गुड़ फैक्ट्री और महामाया गुड़ फैक्ट्री—इन दिनों कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देने में लगी हैं। गन्ना खरीदी को लेकर दोनों पक्षों की लगातार बढ़ती दबंगई, मारपीट और शक्ति प्रदर्शन ने पूरे क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्रियाँ अब उद्योग नहीं, बल्कि “गुंडागर्दी का अड्डा” बन चुकी हैं।

पुराना आर्म्स एक्ट मामला फिर उठा, तनाव बढ़ा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व श्रीराम फैक्ट्री संचालक के खिलाफ देसी कट्टा लहराने का मामला दर्ज हुआ था, जिस पर पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई भी की थी। अब उसी पुराने विवाद को आधार बनाकर दोनों पक्षों के बीच फिर से वैमनस्य बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रंजिशें समय के साथ और भड़कती जा रही हैं।
गुरुवार दोपहर खून-खराबा—संचालक का सिर फूटा, दूसरा पक्ष भी घायल
गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे दोनों फैक्ट्रियों के संचालक और समर्थक आमने-सामने भिड़ गए।
विवाद इतना बढ़ा कि श्रीराम फैक्ट्री संचालक का सिर फट गया और वह खून से लथपथ स्थिति में बतौली थाना पहुँच गया।
वहीं महामाया फैक्ट्री संचालक भी अंदरूनी रूप से घायल हुए।
मौके के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया—
“इन फैक्ट्रियों की दबंगई अब गांव वालों के सिर चढ़कर बोल रही है। हर कुछ दिन पर मारपीट, धमकी और भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन आम बात हो चुकी है।”
अवैध संचालन की आशंका—दस्तावेज संदिग्ध, जांच की मांग
ग्रामीणों ने दोनों फैक्ट्रियों पर अवैध रूप से संचालन का गंभीर आरोप लगाया है।
उनका कहना है कि—
फैक्ट्रियों के दस्तावेज पूरे नहीं होने का गहरा संदेह है
पर्यावरण अनुमति (NOC) स्पष्ट नहीं
लाइसेंस व अन्य वैधानिक कागजातों पर भ्रम
धुआँ और कचरा छोड़कर आसपास के पर्यावरण को नुकसान
किसानों से मनमानी शर्तों पर गन्ना खरीदी
शिकायत करने पर दबंगई और धमकी
ग्रामीणों ने कहा—
“दस्तावेजों को लेकर गंभीर आशंका है। प्रशासन सभी कागजातों की विस्तृत जांच करे और गलत पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई हो।”
आदिवासी गांवों में दहशत—“रात में भी डर लगा रहता है”
ग्रामीण ने बताया कि
“हम आदिवासी शांतिप्रिय लोग हैं, लेकिन इन फैक्ट्रियों की वजह से अब न दिन सुरक्षित, न रात। डर लगा रहता है कि कब कौन-सा विवाद फिर बढ़ जाए।”
ग्रामीणों की एकजुट मांग—दोनों फैक्ट्रियाँ तत्काल सील की जाएं
लगातार विवाद, मारपीट और दस्तावेजों पर संदेह को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है—
1. दोनों फैक्ट्रियों की विस्तृत जांच
2. दस्तावेज अधूरे मिलने पर तत्काल सीलिंग
3. गुंडागर्दी में शामिल व्यक्तियों पर कड़ी धाराओं में FIR
4. क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए
5. गन्ना खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए
बतौली पुलिस की कार्रवाई—दोनों पक्षों पर FIR, सभी एंगल से जांच शुरू
बतौली पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
मारपीट, धमकी, पुरानी रंजिश और अवैध संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि दोषियों को छोड़ने का प्रश्न ही नहीं उठता।
अब प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा
यदि समय पर कठोर निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र की कानून व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर जाएगी
ग्रामीणों का स्पष्ट बयान
“अब सिर्फ औपचारिक कार्रवाई नहीं चाहिए… इन दोनों फैक्ट्रियों को सील करना ही अंतिम समाधान है।”

Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









