
नमदगिरि में आठ साल से अधूरा आदिवासी बालिका छात्रावास: सरकारी धन पानी की तरह बहा, गुणवत्ता की पोल खुली
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता
सूरजपुर/:– जिले के ग्राम पंचायत नमदगिरि में आदिवासी बालिकाओं के लिए बनाया जा रहा छात्रावास सरकारी उदासीनता और विभागीय लापरवाही का जीवंत उदाहरण बन गया है। करोड़ों रुपये की लागत से लगभग 8 वर्ष पहले शुरू हुआ निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना प्रशासनिक सुस्ती और अफसर–ठेकेदार गठजोड़ की भेंट चढ़ती दिख रही है।
मंत्री के निर्देशों की अनदेखी, फिर भी बार-बार समय वृद्धि
17 जनवरी 2024 को उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री अरुण साव ने विभागीय समीक्षा बैठक में निर्देश जारी किए थे कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण किए जाएं, और अब किसी भी कार्य में समय वृद्धि नहीं दी जाएगी।
इसके बावजूद नमदगिरि छात्रावास निर्माण में 31 अक्टूबर 2025 तक सात बार समय वृद्धि दी जा चुकी है। स्थानीय लोग मानते हैं कि संभवतः आठवीं समय वृद्धि भी दे दी गई होगी, क्योंकि निर्माण आज भी पूरा नहीं हुआ है। यह साफ संकेत है कि विभागीय स्तर पर मंत्री के आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है।


भवन पूरा होने से पहले ही जर्जर, दीवारों में दरारें
निर्माण स्थल की वर्तमान स्थिति गुणवत्ता की सच्चाई बयान करती है। ग्रामीणों के अनुसार हल्के दबाव से दीवारों से सीमेंट टूटकर गिर रहा है, कई स्थानों पर चौड़ी दरारें साफ नजर आती हैं, प्लास्टर जगह-जगह उखड़ रहा है, सामग्री और तकनीक दोनों मानकों के विपरीत उपयोग किए गए हैं।
दो वर्ष पुरानी चंपकनगर और नमदगिरि छात्रावास की वीडियो रिपोर्ट में भी घटिया निर्माण स्पष्ट दिखता है। सवाल यह है कि पूरा होने से पहले ही टूटने वाले भवन में क्या बच्चे सुरक्षित रह सकेंगे?
यदि निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए, तो करोड़ों की रकम में हुए बड़े खेल का खुलासा होना तय माना जा रहा है।
सूचना पटल तक नहीं लगाया गया, पारदर्शिता पर सवाल
लोक निर्माण विभाग की किसी भी परियोजना में सूचना पटल अनिवार्य होता है, ताकि जनता को लागत, ठेकेदार और समयसीमा की जानकारी मिल सके। लेकिन नमदगिरि छात्रावास स्थल पर सूचना पटल तक नहीं लगाया गया है। इससे यह संदेह गहराने लगा है कि कहीं जानकारी को जानबूझकर छुपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।

अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना जवाब
जब मामले में लोक निर्माण विभाग सूरजपुर के कार्यपालन अभियंता ललित भोई से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, पिछले पांच महीने से अलॉटमेंट नहीं आ रहा है। पहले की स्थिति नहीं बता पाऊंगा। गुणवत्ता पर कुछ नहीं बोल सकता। कलेक्टर और एसी ट्राइबल से शिकायत कीजिए।
वर्षों से चल रहे काम पर इस तरह का जवाब स्पष्ट करता है कि विभाग निर्माण की देरी और घटिया गुणवत्ताइयों पर कोई सीधी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
आदिवासी बालिकाओं का भविष्य अधर में, कार्रवाई की मांग तेज
आदिवासी बालिका छात्रावास के अधूरे निर्माण ने उन बच्चियों के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है, जिनके सुरक्षित आवास और शिक्षा के लिए यह परियोजना शुरू की गई थी।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, समय वृद्धि के क्रम और भुगतान की प्रक्रिया की जांच हो, दोषी अफसरों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि शासन इस गंभीर मामले में कब जागता है और क्या नमदगिरि में हुए इस बड़े लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









