
Interference in the district after termination of service: Are administrative limits being broken❓
लुण्ड्रा जनपद पंचायत एक बार फिर चर्चा में है—इस बार कारण है एक सेवानिवृत्त बड़े बाबू का कार्यालयीन कार्यों में निरंतर हस्तक्षेप। सेवा समाप्ति के बाद भी संबंधित पूर्व कर्मचारी द्वारा जनपद कार्यालय में लगातार आकर फाइलों को देखना, दिशा-निर्देश देना और कर्मचारियों के कार्य में दखल देना अब एक बड़ी प्रशासनिक शंका का विषय बन गया है।
यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के आत्मसम्मान व गोपनीयता के अधिकार पर सीधा आघात है। जनपद के कई कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे हस्तक्षेप से न सिर्फ उनके काम में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि गोपनीय फाइलों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
इस मामले में अब जनपद स्तर पर भी विरोध तेज हो गया है। लुण्ड्रा जनपद अध्यक्ष और उनके पुत्र अभिषेक पावले ने सार्वजनिक रूप से इस हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया है।
प्रश्न यह उठता है कि क्या लुण्ड्रा जनपद में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी इतने अक्षम हैं कि सेवा समाप्त हो चुके व्यक्ति की “छाया प्रशासन” चलती रहे ❓
यदि ऐसा है, तो यह स्थानीय प्रशासन के प्रशिक्षण और दक्षता पर भी सवाल खड़ा करता है।
यह स्पष्ट है कि सेवानिवृत्त अधिकारी का अनुभव सम्माननीय हो सकता है, लेकिन प्रशासनिक मर्यादाएं उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं। अनुभव का उपयोग परामर्श के रूप में हो सकता है, लेकिन प्रत्यक्ष हस्तक्षेप न केवल अनुचित है, बल्कि यह पूरी प्रणाली के लिए एक खराब उदाहरण पेश करता है।


समय आ गया है कि लुण्ड्रा जनपद इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और ठोस कदम उठाए ताकि प्रशासनिक गोपनीयता, कर्मचारियों का मनोबल और कार्यालय की गरिमा बनी रहे।
क्या लुण्ड्रा के अधिकारी और कर्मचारी अब सेवानिवृत्त लोगों के निर्देशों में काम करेंगे❓
???? क्या प्रशासन के पास अनुभव और जिम्मेदारी से काम करने वाले कार्यरत कर्मचारी नहीं हैं❓
अगर किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को कार्यालय में बार-बार आकर फाइलें पलटने, कर्मचारियों को दिशा देने और अपनी मर्जी चलाने की खुली छूट दी जाती है, तो इसका सीधा संदेश यही निकलता है कि –
???? या तो वर्तमान अधिकारी अयोग्य हैं❓
???? या फिर प्रशासनिक ढांचे में अंदरूनी राजनीतिक दबाव काम कर रहा है❓
???? प्रश्न यह भी उठता है कि जब रिटायरमेंट हो चुका है, सेवा समाप्त हो चुकी है, तो ऐसे व्यक्ति का कार्यालय में आकर दखल देना किस कानून, किस नियम के तहत सही ठहराया जा रहा है❓
???? यह न केवल प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि मौजूदा अधिकारियों के आत्म-सम्मान और कामकाज की स्वतंत्रता पर भी हमला है।
Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









