
गढडा गोपीनाथजी मंदिर में जलझिलनी एकादशी धूमधाम से मनाई गई: पारंपरिक मंदिर पूजा और बोटिंग के बाद, ठाकोरजी भक्तराज दादा खाचर के वंशज प्रतापभाई खाचर के घर गए।
गढडा (बोटाद): भादरवा सुद अगियारस यानी जलझिलनी एकादशी का पवित्र त्योहार गढडा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री गोपीनाथजी देव मंदिर में खुशी और भक्ति भरे माहौल में मनाया गया। इस मौके पर हजारों भक्तों की मौजूदगी में भगवान श्री गोपीनाथजी देव की भव्य पालकी (शोभायात्रा) निकाली गई। त्योहार की शुरुआत में सबसे पहले श्री गोपीनाथजी देव मंदिर में ठाकोरजी की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गई। फिर भक्तों के जयकारों के साथ ठाकोरजी की पालकी पवित्र घेलो नदी के रामा घाट पहुंची। जहां शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से भगवान को घेलो नदी में नाव की सवारी (नौका विहार) कराकर भव्य जल उत्सव मनाया गया। नाव की सवारी के पवित्र कार्यक्रम के बाद, सदियों पुरानी ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, ठाकोरजी की पालकी यात्रा भगवान स्वामीनारायण के परम भक्त भक्तराज दादा खाचर के वंशज श्री प्रतापभाई खाचर और श्री महावीरभाई खाचर के घर पधरमणी के लिए रवाना हुई। भगवान और भक्तों के बीच प्यार के अनमोल बंधन को ज़िंदा रखने वाली इस परंपरा के तहत, प्रतापभाई खाचर और महावीरभाई खाचर और उनके परिवार के सदस्यों ने ठाकोरजी का कुमकुम तिलक, फूलों की वर्षा और एक बड़ी आरती-थाल देकर भक्ति भाव से स्वागत किया और पूजा की। मंदिर के चेयरमैन कोठारी स्वामी और संतों-महंतों की देखरेख में हुए इस पवित्र उत्सव में, कीर्तन-धुन और जयघोषों से पूरा गढडा शहर स्वामीनारायण मय हो गया।
कनुभाई खाचर की रिपोर्ट













