
मनरेगा को मिला जीवनदान : ग्रामीणों के आंदोलन का असर, अनशन–ज्ञापन के बाद शुरू हुआ रोजगार
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता भैयाथान:– महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लंबे समय से रोजगार नहीं मिलने से परेशान ग्राम पंचायत सतनगर के सैकड़ों ग्रामीणों का संघर्ष आखिरकार रंग ले आया। रोजगार की मांग को लेकर जनपद पंचायत भैयाथान कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपने और शांतिपूर्ण अनशन करने के बाद संबंधित विभाग ने तत्परता दिखाते हुए मनरेगा के अंतर्गत कार्य प्रारंभ कर दिए हैं। इससे ग्रामीणों में राहत और संतोष का माहौल है।
ग्रामीणों ने हाथों में पारंपरिक औजार लेकर यह संदेश दिया था कि वे काम करना चाहते हैं, भीख नहीं। ग्रामीणों का आरोप था कि 100 दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली योजना कागजों तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत में गांवों में काम उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में गहराया था रोजगार संकट
ग्रामीणों ने बताया कि जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत सतनगर आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां अधिकांश परिवारों की आजीविका मनरेगा पर निर्भर है। लंबे समय से कोई कार्य स्वीकृत नहीं होने के कारण मजदूरों को बाहर पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा था, जिसका असर बच्चों की पढ़ाई, परिवार की सामाजिक स्थिरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था।
ज्ञापन और अनशन के बाद दिखी विभागीय तत्परता
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए सामूहिक ज्ञापन और अनशन के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर मनरेगा कार्यों की शुरुआत कर दी गई, जिससे ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार मिलना शुरू हो गया है।
पलायन पर लगेगी रोक, ग्रामीणों को मिली राहत
मनरेगा कार्य शुरू होने से अब ग्रामीणों को बाहर जाकर मजदूरी करने की मजबूरी नहीं रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी प्रकार समय पर कार्य स्वीकृत होते रहे, तो न केवल पलायन रुकेगा बल्कि ग्रामीणों को सम्मानजनक आजीविका भी सुनिश्चित होगी।
ग्रामीणों ने जताया आभार, रखी निरंतरता की मांग
समय रहते सकारात्मक पहल करने पर ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है। साथ ही यह अपेक्षा भी जताई है कि भविष्य में मनरेगा योजना को कागजों से निकालकर ज़मीनी स्तर पर नियमित रूप से लागू किया जाए, ताकि गरीब और मजदूर वर्ग को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।










