विवादित प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव पर छेड़छाड़ व एट्रोसिटी का संगीन केस दर्ज छात्राओं के 25 किमी पैदल मार्च के बाद फिर मचा हड़कंप गोलावण्ड से बतौली तक दागदार इतिहास

विवादों के भंवर में ईएमआरएस बतौली: छात्राओं के 25 किमी पैदल मार्च के बाद अब प्राचार्य पर छेड़छाड़ व एट्रोसिटी का संगीन केस दर्ज; कोण्डागांव की पुरानी जांच के बाद भी प्रभार मिलने पर भड़के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत
मेडिकल कक्ष में अशोभनीय कृत्य, जान से मारने और नौकरी से निकालने की धमकी; बतौली थाने में एफआईआर पंजीबद्ध !
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत बोले— विवादित प्राचार्य को दोबारा प्रभार देना घोर अनुचित, 5वीं अनुसूची क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर हो कड़ी कार्रवाई ।
विशेष संवाददाता, अंबिकापुर/बतौली: -आदिवासी अंचल के छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट और सुरक्षित आवासीय शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) शिवपुर, बतौली की साख पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। विद्यालय की छात्राओं द्वारा अव्यवस्थाओं के खिलाफ जिला मुख्यालय तक किए गए 25 किलोमीटर लंबे ऐतिहासिक पैदल मार्च का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि संस्था के प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव के विरुद्ध बतौली थाने में छेड़छाड़, लैंगिक उत्पीड़न और एट्रोसिटी एक्ट (SC/ST Act) की धाराओं में गंभीर अपराध दर्ज किया गया है।
थाने में दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट– (अपराध क्रमांक 0143/2026) के आधार पर बतौली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
मेडिकल कक्ष में बदनीयती से दबोचा, जातिसूचक शब्द और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप–
थाने में प्रस्तुत लिखित शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने प्राचार्य के आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं:
मेडिकल रूम में अशोभनीय व्यवहार: शिकायत के मुताबिक, 15 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे पीड़िता विद्यालय के मेडिकल कक्ष में दवाइयों की व्यवस्था कर रही थी। आरोप है कि उसी समय प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव कक्ष में पहुंचे और पीछे से पकड़कर बदनीयती से अशोभनीय कृत्य करते हुए अनैतिक शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला।
जातिसूचक टिप्पणियां व प्रलोभन: पीड़िता द्वारा विरोध किए जाने पर आरोपी प्राचार्य ने जातिसूचक फब्तियां कसीं और प्रलोभन देते हुए कहा कि “जितना चाहोगी उतना फायदा करवाऊंगा, सोच लो फिर मुझे बताना और किसी को मत बताना”।
सेवा समाप्ति और जान से मारने की धमकी: बात मानने से इनकार करने पर आरोपी ने पद का दुरुपयोग करते हुए खुलेआम धमकी दी कि “अगर घरवालों या किसी को कुछ भी बोलोगी तो नौकरी से निकाल दूंगा और जान से मारकर फेंकवा दूंगा, किसी को पता भी नहीं चलेगा”।
मानसिक प्रताड़ना व पीछा करना: पीड़िता का कहना है कि आरोपी लगातार उस पर बुरी नजर रखते हुए भद्दे कमेंट्स और अशोभनीय इशारे कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा है।
कानूनी शिकंजा:- बीएनएस और एट्रोसिटी की इन धाराओं में अपराध दर्ज बतौली थाना पुलिस ने पीड़िता की लिखित शिकायत पर आरोपी प्राचार्य के विरुद्ध निम्नलिखित गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराएं:
धारा 74 (महिला की लज्जा भंग करने के आशय से आपराधिक बल प्रयोग या हमला)
धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न)
धारा 78(2) (पीछा करना/स्टॉकिंग)
धारा 79 (शब्दों, इशारों या कृत्यों से महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना)
धारा 351(3) (जान से मारने की आपराधिक धमकी)  अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015): धारा 3(1)(w)(i) एवं 3(1)(w)(ii) (अनुचित स्पर्श, लैंगिक लाभ का प्रयास व शीलभंग) धारा 3(2)(va) (अनुसूचित वर्ग के व्यक्ति के विरुद्ध अपराध कारित करना)।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने जताई कड़ी आपत्ति: “विवादित प्राचार्य को दोबारा प्रभार देना घोर अनुचित”- इस गंभीर मामले पर पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है। पूर्व मंत्री ने कड़ा बयान देते हुए कहा।

“एकलव्य आवासीय विद्यालय जैसे संवेदनशील और प्रतिष्ठित संस्थान में विवादों में घिरे प्राचार्य को दोबारा पदभार सौंपना कतई उचित नहीं है। यह पूरा क्षेत्र संविधान की 5वीं अनुसूची (Schedule Five Area) के अंतर्गत आता है, जो विशेष रूप से आदिवासी समाज के अधिकारों और सुरक्षा के संरक्षण के लिए है। प्रशासन को सभी तकनीकी, सामाजिक और कानूनी पहलुओं को गंभीरता से ध्यान में रखते हुए आरोपी के खिलाफ अविलंब निष्पक्ष और कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।”

छात्राओं के 25 किमी पैदल मार्च के बाद जांच कमेटी का गठन
उल्लेखनीय है कि बीते 7 सितंबर 2026 को विद्यालयीन समस्याओं, बदहाली और प्राचार्य की कार्यशैली के विरोध में विद्यालय की छात्राएं 25 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए सीधे अंबिकापुर कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। संभाग स्तर पर मचे हड़कंप के बाद कलेक्टर सरगुजा द्वारा संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय जांच समिति का गठन कर प्राचार्य को सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय अटैच किया गया था लेकिन प्राचार्य को पुनः प्रशासनिक रूप से सक्रिय किए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष पनप रहा था।


कोण्डागांव (गोलावण्ड) में भी रहा है पुराना विवादित इतिहास
प्राचार्य ओम नारायण श्रीवास्तव का पूर्व पदस्थापना स्थल ईएमआरएस गोलावेण्ड (जिला कोण्डागांव) भी प्रशासनिक जांचों और मेमोरेंडम से घिरा रहा है:–

लापता छात्रा का मामला दबाना: अगस्त 2025 में कक्षा 10वीं की एक छात्रा के चार दिनों तक स्कूल से गायब रहने की घटना की सूचना दबाने और लापरवाही बरतने के आरोप में एसडीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी।
मेस में सड़े खाद्य पदार्थ व बुनियादी बदहाली:– कोण्डागांव मेमोरेंडम के अनुसार, मेस में सड़े केले व आलू परोसने, पेयजल के लिए आरओ बंद रहने, जनरेटर खराब होने, प्रसाधन बंद रहने और पालकों व शिक्षकों से दुर्व्यवहार के आरोप अभिलेखों में दर्ज हैं।
आदेशों की अवहेलना:- उच्च अधिकारियों के अटैचमेंट व प्रभार सौंपने के आदेश की अवहेलना करने और सीसीएस (आचरण) नियम 1964 के घोर उल्लंघन का आरोप भी पूर्व से दर्ज है।
एक तरफ पूर्व पदस्थापना में प्रशासनिक विफलता के आरोप और दूसरी तरफ छात्राओं के आंदोलन के बाद अब सीधे थाने में छेड़छाड़ व एट्रोसिटी का संगीन मुकदमा दर्ज होना—इस पूरे घटनाक्रम ने आदिवासी विकास विभाग और शिक्षा प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल बतौली पुलिस ने मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

भाजपा नेता की शिकायत पर सीएम सचिवालय ने लिया था संज्ञान: स्कूल शिक्षा विभाग को दिए गए थे कार्रवाई के निर्देश
अंबिकापुर/रायपुर:-ईएमआरएस शिवपुर बतौली में मचे बवाल और व्यवस्थाओं की बदहाली को लेकर मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन के सर्वोच्च स्तर तक भी इसकी शिकायतें पहुंची थीं।
प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज़ों के अनुसार, भाजपा अनुसूचित जनजाति (अजजा) मोर्चा के प्रदेश मंत्री ललित नागेश (निवासी बगडोल, बगीचा, जिला जशपुर) ने विद्यालय से जुड़ी अनियमितताओं और समस्याओं को लेकर सीधे मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था।
सीएम सचिवालय से जारी हुआ था पत्र:
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र (क्रमांक 2500726016926/मु.मं.नि./2026) प्रेषित किया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अवर सचिव मुकेश कुमार गोंड द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि:
प्रस्तुत आवेदन पत्र पर नियमानुसार आवश्यक व कड़ी कार्रवाई की जाए। की गई कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाए।
पूरे प्रकरण और कृत कार्रवाई की संक्षिप्त जानकारी तथा संबंधित अभिलेख ‘जनदर्शन पोर्टल’ (jandarshan.cg.nic.in) पर अपलोड किए जाएं।

सियासी हलकों में चर्चा:
राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब स्वयं भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई जा चुकी थी और सीएम सचिवालय से स्कूल शिक्षा विभाग को सीधे निर्देश जारी हुए थे, तब भी स्थानीय स्तर पर ठोस सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय लीपापोती का खेल क्यों चलता रहा।

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