ज़िले में फैला अवैध खाद का जाल;
कृषि विभाग की मुस्तैदी से 70 बोरी यूरिया के साथ पिकअप जप्त

ज़िले में फैला अवैध खाद का जाल; कृषि विभाग की मुस्तैदी से 70 बोरी यूरिया के साथ पिकअप जप्त
सीतापुर-रुपेश गुप्ता सरगुजा जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध आवागमन को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से उपसंचालक कृषि पीताम्बर सिंह दीवान के मार्गदर्शन में कृषि विभाग निरंतर सक्रिय है। इसी कड़ी में, बीती रात सीतापुर एवं मैनपाट कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे नीम कोटेड यूरिया को पीकअप के साथ जप्त किया है।

इस कार्रवाई वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) सीतापुर श्रीमती लीली मॉरिस बाखला एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) मैनपाट गंगा राम पैंकरा के संयुक्त टिम शामिल थी।मुखबिर की सूचना के आधार पर टीम ने रात्रि सीतापुर के प्रमुख मार्ग पर घेराबंदी की। इस दौरान संदिग्ध अवस्था में जा रहे पिकअप वाहन क्रमांक CG 14 MK 6568 को रोका गया। वाहन के निरीक्षण के दौरान उसमें 70 बोरी नीम कोटेड अवेध यूरिया लदा हुआ पाया गया।
कानूनी उल्लंघन और जब्ती:


मौके पर उपस्थित उर्वरक निरीक्षक संतोष कुमार बेक एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) अमित गुप्ता ने वाहन चालक से उर्वरक परिवहन से संबंधित अनिवार्य दस्तावेजों की मांग की। चालक द्वारा कोई भी वैध कागजात जैसे पीओएस (POS) रसीद, एम-फार्म, ई-वे बिल या अधिकृत चालान प्रस्तुत नहीं किया गया। बिना किसी दस्तावेज के परिवहन को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन मानते हुए, वाहन सहित समस्त उर्वरक को जप्त कर थाना सीतापुर को सुपुर्द कर दिया गया है।

हुआ अवैध नेटवर्क का खुलासा:
प्रारंभिक पूछताछ में वाहन चालक ने स्वीकार किया कि उक्त उर्वरक अन्नपूर्णा खाद भंडार पत्थलगांव का है, जिसे कमलेश्वरपुर (मैनपाट) निवासी अजीत गुप्ता (पिता मोहन गुप्ता) द्वारा मंगवाया गया था। हालांकि, प्रशासनिक शिकंजा कसते ही जप्त खाद की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी दावेदार सामने नहीं आया है। विभाग ने प्रकरण तैयार कर न्यायालय कलेक्टर सरगुजा को अग्रिम दंडात्मक कार्यवाही हेतु सौंप दिया है।

वर्तमान में मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर खाद की आपूर्ति में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका लाभ उठाकर कुछ तत्व मिलावटखोरी का प्रयास कर रहे हैं। इसे देखते हुए अधिकारियों ने जप्त खाद के नमूने (Samples) लेकर राजकीय प्रयोगशाला भेजे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों तक पहुंचने वाला उर्वरक नकली या अमानक तो नहीं है।

SADO श्रीमती लीली मॉरिस बाखला ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की पैनी नजर  कालाबाजारी करने वालों पर है आगे भी इस तरह की कार्यवाही जारी रहेगा।

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