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आयुष्मान भारत योजना पर संकट: छत्तीसगढ़ के निजी अस्पतालों का करोड़ों का भुगतान लंबित, इलाज पर असर

SHAIF FIRDOUSI SNT NEWS छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। राज्य के निजी अस्पतालों को जनवरी से मार्च 2025 तक योजना के तहत किए गए इलाज का पूर्ण भुगतान अब तक नहीं मिला है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (AHPI), छत्तीसगढ़ चैप्टर ने राज्य सरकार को औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एएचपीआई छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता द्वारा मुख्य सचिव श्री विकासशील (आईएएस) और स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया (आईएएस) को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि चुनिंदा अस्पतालों को आंशिक भुगतान जरूर किया गया, लेकिन अब भी बहुत बड़ी राशि बकाया है। इससे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई लंबित प्रकरणों को अस्पतालों का पक्ष सुने बिना जिला एवं राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (DGRC एवं SGRC) में एकतरफा और विधि विरुद्ध तरीके से खारिज कर दिया गया। जबकि वर्ष 2023, 2024 और 2025 से जुड़े अनेक मामलों में DGRC और SGRC स्तर पर भुगतान की सहमति बन चुकी थी, फिर भी राशि जारी नहीं की गई।
एएचपीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि लगातार भुगतान में देरी के चलते संगठन को काम बंद करने का आह्वान करना पड़ा था। इसके बाद अप्रैल से अगस्त 2025 तक आंशिक भुगतान हुआ, लेकिन बीते पांच महीनों से फिर भुगतान पूरी तरह ठप है। इसका सीधा असर अस्पताल संचालन पर पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि कई अस्पताल आपातकालीन इलाज को छोड़कर अन्य इलेक्टिव इलाज के मरीजों को लौटाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। आने वाले समय में, विशेषकर धान खरीदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जब ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अस्पतालों का रुख करेंगे, तब उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पत्र में चिंता जताई गई है कि पिछले दो वर्षों में हर छह महीने में भुगतान लंबित होने की स्थिति ने आयुष्मान योजना में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। एएचपीआई ने मांग की है कि योजना के तहत प्रति माह पारदर्शी भुगतान प्रणाली विकसित की जाए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
एएचपीआई छत्तीसगढ़ ने सरकार से अनुरोध किया है कि अस्पतालों का बकाया भुगतान शीघ्र जारी किया जाए और DGRC एवं SGRC की हर माह विधि सम्मत बैठकें आयोजित कर विवादित मामलों का समाधान किया जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए बनी रहेगी या भुगतान संकट में दम तोड़ देगी ? और क्या सरकार समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था को संभाल पाएगी?

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Author: SNT NEWS

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