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आठवें दिन भी जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल, 17 गाँव आज भी अंधेरे में सर मुंडवाकर जताया विरोध

लगातार आठवें दिन भी जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल, 17 गाँव आज भी अंधेरे में
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ राजेश गुप्ता सूरजपुर
सूरजपुर/बिहारपुर:–आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी सूरजपुर जिले के 17 गाँव ऐसे हैं, जहाँ न बिजली पहुँची, न विकास की रोशनी। मूलभूत सुविधाओं से वंचित इन गाँवों के ग्रामीणों का सब्र अब टूट चुका है। इसी आक्रोश का परिणाम है कि अनिश्चितकालीन हड़ताल आज आठवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी जस की तस बनी हुई है।

सर मुंडवाकर जताया विरोध, फिर भी जिम्मेदार मौन

हड़ताल के आठवें दिन आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया। धरने पर बैठे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से सिर मुंडवाकर प्रशासन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। यह विरोध सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि उस पीड़ा का इज़हार है, जिसे वर्षों से अनदेखा किया जा रहा है। सवाल यह है कि इतने बड़े और भावनात्मक विरोध के बावजूद भी जिम्मेदार अब तक खामोश क्यों हैं?

न जनप्रतिनिधि पहुँचे, न प्रशासन ने सुनी आवाज

लगातार चल रहे इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अब तक धरनास्थल से नदारद हैं। न कोई संवाद, न कोई ठोस पहल, न कोई आश्वासन। क्या जनता की समस्याओं पर संज्ञान लेना अब प्रशासन की प्राथमिकता नहीं रह गई है?

ग्रामीणों का स्पष्ट अल्टीमेटम

धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि जब तक बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर ठोस और लिखित निर्णय नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई अब सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।

क्या सूरजपुर प्रशासन की मानवता मर चुकी है ?

आठ दिन बीत जाने के बाद भी यदि प्रशासन का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुँचता, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता का प्रमाण है। जनता पूछ रही है कि क्या सूरजपुर जिला प्रशासन की मानवता मर चुकी है? या फिर अंधेरे में जी रहे इन गाँवों की कोई कीमत ही नहीं?

धरनास्थल से उठ रही एक ही आवाज अब पूरे जिले में गूँज रही है कि अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए… जब तक रोशनी नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

Shaif firdousi
Author: Shaif firdousi

KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !

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