
NH-43 becomes a hub of waterlogging: Road or pond from Darima Chowk to Kharsia Naka ?
अंबिकापुर | सरगुजा न्यूज़ टुडे
सरगुजा जिले का हृदय—अंबिकापुर शहर—जिसका मुख्य मार्ग NH-43 दरिमा चौक से लेकर खरसिया नाका तक इन दिनों किसी तालाब जैसा नज़ारा पेश कर रहा है। यह सड़क न सिर्फ अंबिकापुर को जोड़ती है, बल्कि जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अन्य ज़रूरी संस्थानों तक पहुँचने का भी मुख्य मार्ग है।


बारिश के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। सड़क पर गड्ढे और पानी का भराव दोपहिया चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दुर्घटनाएं आम हो चुकी हैं, और आए दिन मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस तक इस जलभराव में फँस जाती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “प्रशासन केवल कागज़ों पर सक्रिय है, ज़मीनी हकीकत से उसका कोई वास्ता नहीं दिख रहा।”
व्यवसायी वर्ग और आम जनता दोनों ही इस मार्ग से तंग आ चुके हैं। ट्रैफिक जाम, धूल, कीचड़ और जलभराव अब अंबिकापुर की पहचान बनते जा रहे हैं, जो शर्मनाक है।
प्रश्न उठता है – आखिर जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर क्यों नहीं?

क्या कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही व्यवस्था जागेगी ?
सरकार की तमाम स्मार्ट सिटी और सड़क विकास योजनाएं यहां असफल नजर आती हैं। समय आ गया है कि स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और NH विभाग और PWD विभाग मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से लें और इस मार्ग की तत्काल मरम्मत व जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें।
Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









