Surguja News Today

सम्पादकीय: जनहित बनाम सरकारी आदेश — क्या मीडिया पर लगाम जायज़ है?

दिनांक: 20 जून 2025
संपादक: शैफ फिरदौसी | Surguja News Today

हाल ही में छत्तीसगढ़ के कुछ सरकारी अस्पतालों में मीडिया के प्रवेश को लेकर जो आदेश जारी किया गया, उसने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा उस आदेश पर रोक लगा दी गई, लेकिन यह प्रकरण एक चेतावनी के रूप में सामने आया है।

मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, और इसका कार्य केवल खबर देना ही नहीं, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। जब मीडिया को अस्पताल, स्कूल, पंचायत या अन्य किसी सार्वजनिक संस्थान में रिपोर्टिंग से रोका जाता है, तो यह न केवल प्रेस की आज़ादी का हनन होता है, बल्कि जनता के अधिकारों पर भी कुठाराघात होता है।

यह बात समझनी होगी कि अगर मीडिया को मैदान से दूर कर दिया गया, तो भ्रष्टाचार, लापरवाही और कुप्रबंधन को छुपाना और आसान हो जाएगा। वही मीडिया जब किसी गरीब की आवाज़ बनता है, तब उसी की रिपोर्टिंग से किसी को इंसाफ़ या इलाज मिलता है।

मंत्री जी का यह निर्णय कि मीडिया बैन पर रोक लगाई जाए — स्वागत योग्य है, लेकिन ज़रूरत है कि ऐसे आदेश दोबारा जारी न हों और न ही किसी अधिकारी को इसका दुरुपयोग करने का अवसर मिले।

जनता का हक़ है जानना — और मीडिया का फर्ज़ है बताना।
इस संतुलन को बनाए रखना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।

Shaif firdousi
Author: Shaif firdousi

KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !

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