
सरगुजा जिले के मैनपाट में इन दिनों जंगली हाथियों का कहर देखने को मिल रहा है हाथियों का दल रिहायशी इलाकों में विचरण कर रहा है और ग्रामीण के घरों को जमकर निशाना साध रहा है एक सप्ताह के भीतर दर्ज़नो से ज्यादा घरों को हाथियों ने तहस-नहस कर तोड़ डाला!
कई एकड़ फसलों को भी रौंद किसानों को नुक्सान पहुंचाया है लेकिन दूसरी तरफ वन अमला कुंभकर्णिय नींद में सो रहा है गांव में उजड़ते घर को देखने सुबह जाते हैं रात में एक भी वन अमला गांव में नहीं पहुंचता वहीं मुआवजा केवल कागजों में धरा का धरा रह जाता है,,
आखिर ज़िम्मेदार वन विभाग हाथियों को रोकने में असफल क्यों वन विभाग के कमर्चारि बिल्कुल सुस्त रहते हैं न कभी जंगल कि ओर जाते हैं न कभी गांव में ये अपने केवल आफिस में ही महगुल रहते ऐसे में ग्रामीण खुद अपने जान को दांव पर रखकर रात में माचा बनाकर रहते हैं और रतजगा जागने को मजबुर
दुसरी तरफ इनको राशन पानी का भी वितरण केवल कागजों में किया जाता है

आखिर वन विभाग कि मनमानी का खामियाजा ग्रामीणों को क्यों उठाना पड़ रहा है यह एक बड़ा सवाल है इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए,, ग्रामीण जब शाम होता है तो चावल दाल सब्जी को पेड़ में टांगकर घर से अपने सुरक्षा के दृष्टी से बनाए गए माचा कि ओर जाते हैं और जब हाथि घर तोड देता है तो सुबह जब घर लोटते है तो मंजर ऐसा दिखता है जिसे देख ग्रामीण दहशत में आ जाते हैं आखिर ज़िम्मेदार रात में क्यों नहीं पहुंचते ज़िम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।।।।
सप्ताह भर के भीतर दर्ज़नो घरों को हाथियों के दल ने तोड़ दिया
मैनपाट के रिहायशी इलाका बरडाड बरवावली दातीढाब गांव में इन दिनों जंगली उत्पाती हाथियों का दल विचरण कर रहा है, ऐसे में ग्रामीण खुद सुरक्षा का दायित्व लेकर जीवन बसर करने में परेशान हाल है इस ओर न कोई जनप्रतिनिधि ध्यान दें रहा है नहीं प्रशासन कब तक वन विभाग मनमानी करेगा यह सवालिय निशान वन विभाग मैनपाट पर सठीक बैठता दिखाई पड रहा है।।।

Author: Ramjaan Khan









