
भैंसामुंडा महानदी पुल, लाखों की मरम्मत पर सवाल, डेढ़ महीने में ही उखड़ने लगा काम
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता
सूरजपुर/प्रतापपुर:– जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में महानदी पर स्थित भैंसामुंडा पुल एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग डेढ़ महीने पहले जिस पुल की मरम्मत को लेकर बड़े दावे किए गए थे, वही कार्य अब धरातल पर सवालों के घेरे में आ गया है। मरम्मत के बाद ही पुल की परतें उखड़ने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
इससे पहले भी स्थानीय अखबारों में प्रकाशित खबरों में मरम्मत कार्य शुरू होते ही विवाद और अनियमितताओं के संकेत मिल चुके थे। उस समय उठे सवाल अब हकीकत बनते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पुल की मरम्मत के लिए लाखों रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के आधे हिस्से से भी कम क्षेत्र में ही काम किया गया, जबकि बाकी हिस्सों में मौजूद गड्ढों को भरना तक जरूरी नहीं समझा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि कार्य को जल्दी-जल्दी निपटाने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया गया, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है।
मरम्मत कार्य में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। डेढ़ महीने के भीतर ही सड़क की परत उखड़ना इस बात का संकेत है कि काम मानकों के अनुरूप नहीं किया गया। पुल की स्थिति धीरे-धीरे फिर पहले जैसी होती जा रही है, जिससे राहगीरों के लिए खतरा बढ़ गया है।
इस पूरे मामले में विभागीय इंजीनियरों की मॉनिटरिंग भी कठघरे में है। लोगों का कहना है कि यदि कार्य की सही निगरानी की जाती, तो इतनी जल्दी मरम्मत खराब नहीं होती।

वर्तमान स्थिति ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्रवासियों में आक्रोश है कि आखिर ऐसे ठेकेदारों को टेंडर क्यों दिया जाता है, जो निर्माण कार्य को केवल पैसे कमाने का माध्यम बना देते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पुल की मरम्मत नई तकनीक और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप दोबारा कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।












