सलका मुक्तिधाम निर्माण में अनियमितताओं के आरोप, गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल

सलका मुक्तिधाम निर्माण में अनियमितताओं के आरोप, गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल

सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर  राजेश गुप्ता भैयाथान – सलका – जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में लगभग 4 लाख 89 हजार रुपए की लागत से निर्मित हो रहा मुक्तिधाम इन दिनों विवादों के केंद्र में है। वर्षों पहले शुरू हुआ यह निर्माण कार्य आज तक पूर्ण नहीं हो सका है और हाल ही में दोबारा शुरू किए गए कार्य की गुणवत्ता तथा प्रगति को लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है।

मुक्तिधाम स्थल पर चल रहे निर्माण कार्य की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। प्रथम दृष्टया ही निर्माण में गंभीर तकनीकी खामियां दिखाई दे रही हैं। कॉलम (खंभों) की ढलाई कमजोर और असमान नजर आ रही है, कंक्रीट कार्य की फिनिशिंग भी बेहद खराब बताई जा रही है। वहीं बांस के सहारे अव्यवस्थित और असंतुलित ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर संदेह उत्पन्न हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ था और अब जब इसे पुनः शुरू किया गया है, तब भी कार्य की गति और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण केवल औपचारिकता तक सीमित रह गया है, जबकि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की निगरानी पर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो नियमित रूप से इंजीनियरों की मौजूदगी देखी जा रही है और न ही अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण किया जा रहा है। ऐसे में यह संदेह गहरा रहा है कि कहीं निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित तो नहीं रह गया है और बिना वास्तविक जांच के ही कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी राशि का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है और निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर सही तरीके से निरीक्षण किया गया होता, तो निर्माण में इस प्रकार की अनियमितताएं सामने नहीं आतीं। अब वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, साथ ही यह भी चाहते हैं कि दोषी पाए जाने पर संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

मुक्तिधाम जैसे सामाजिक और भावनात्मक रूप से जुड़े स्थल के निर्माण में इस तरह की लापरवाही न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती है, बल्कि आमजन की भावनाओं को भी आहत करती है। यदि समय रहते इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी साबित होगा, बल्कि भविष्य में यह ढांचा किसी बड़े खतरे का कारण भी बन सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाती है या नहीं।

बयान
सरपंच शिवकुमार अगरिया ने बताया कि मुक्तिधाम का निर्माण पूर्व कार्यकाल में अधूरा छोड़ दिया गया था और अधिकांश राशि खर्च हो चुकी थी। वर्तमान में बची हुई राशि के साथ-साथ अतिरिक्त खर्च वे स्वयं वहन कर निर्माण कार्य पूरा कराने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि एक कॉलम में कमी है, जिसे प्लास्टर से सुधार दिया जाएगा।

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