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जंगल के रक्षक ही बने भक्षक ? सूरजपुर वन मंडल के प्रतापपुर रेंज में खुलेआम कटाई, खनन और लकड़ी बिक्री का खेल

जंगल के रक्षक ही बने भक्षक ? सूरजपुर वन मंडल के प्रतापपुर रेंज में खुलेआम कटाई, खनन और लकड़ी बिक्री का खेल
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता
सूरजपुर/प्रतापपुर:–सूरजपुर वन मंडल के अंतर्गत वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के बंशीपुर और सोनगरा क्षेत्र में जंगलों के साथ जो कुछ हो रहा है, वह अब केवल अवैध गतिविधि नहीं बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मौके से प्राप्त तस्वीरें, जीपीएस लोकेशन और सूत्रों से मिली जानकारी इस ओर इशारा कर रही है कि जंगलों की कटाई, लकड़ी की निकासी और अवैध खनन विभागीय संरक्षण में कराया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार बनारस रोड, केदली नाला, बंशीपुर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर जंगल क्षेत्र में कोयला खोदकर निकाला जा रहा है, और यह पूरा काम वन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों व अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण में चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गतिविधियों के बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है और न ही रोकथाम।
जंगल की सुरक्षा के लिए लगाए गए फेंसिंग तारों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका है, लेकिन विभाग की ओर से न मरम्मत की गई और न ही सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास नजर आए। इससे स्पष्ट होता है कि जंगल को जानबूझकर असुरक्षित छोड़ा गया।

सूत्र यह भी बताते हैं कि विभाग का एक जिम्मेदार कर्मचारी यह तर्क देता फिरता है कि
यह जंगल क्षेत्र खदान के डिप्लरिंग (डंपिंग/डिस्प्लेसमेंट) एरिया में आता है, इसलिए यहां जंगल का कटना तय है।

इसी दलील की आड़ में पेड़ों की कटाई को जायज ठहराते हुए यह मानसिकता बना दी गई है कि जब कटना ही है तो अभी काट लो। सबसे गंभीर आरोप यह है कि जंगल से लकड़ी डिपो ले जाने के नाम पर विभागीय जिम्मेदार खुद की गाड़ी से लकड़ी बाहर ले जाकर बेच देता है। यदि यह आरोप सत्य है, तो यह सिर्फ वन अपराध नहीं बल्कि सरकारी पद के दुरुपयोग और संगठित भ्रष्टाचार का मामला बनता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब बंशीपुर और सोनगरा के जंगल कट रहे थे, तब प्रतापपुर रेंज का रेंजर आखिर क्या कर रहा था? क्या रेंजर को अपने क्षेत्र में हो रही इन गतिविधियों की जानकारी नहीं थी, या फिर जानकारी होते हुए भी चुप्पी साधी गई?

वन विभाग के नियमों के अनुसार अपने क्षेत्र की सुरक्षा की पहली और सीधी जिम्मेदारी रेंजर की होती है। ऐसे में यदि रेंजर अनजान था तो यह घोर लापरवाही है, और यदि सब जानते हुए भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सीधी मिलीभगत और संरक्षण का मामला बनता है।

अब मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रहा। यह सूरजपुर वन मंडल की जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी से जुड़ा सवाल बन चुका है। यदि समय रहते स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह प्रकरण साबित करेगा कि जंगलों के सबसे बड़े दुश्मन वही बन बैठे हैं, जिन्हें उनका सबसे बड़ा रक्षक होना चाहिए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रतापपुर रेंज के जिम्मेदारों की भूमिका की जांच होगी? क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी? या फिर जंगलों की यह लूट भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? क्योंकि अगर रेंजर के इलाके में जंगल कटे और जवाब कोई न दे तो जंगल बचेगा कैसे?

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Author: SNT NEWS

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