Surguja News Today

सुशासन में माफियाराज! नामजद हमलावर खुलेआम, कानून बेबस

सुशासन में माफियाराज! नामजद हमलावर खुलेआम, कानून बेबस

मैकल में पत्रकार पर हमला — 10 दिन बाद भी न गिरफ्तारी, न जब्ती

अनूपपुर / अमरकंटक / जीपीएम | विशेष रिपोर्ट
“सुशासन” के दावों के बीच मैकल पर्वत क्षेत्र आज माफिया शासन का खुला सबूत बनता जा रहा है। अवैध खनन, ब्लास्टिंग और पत्थर तस्करी के खिलाफ लगातार सच उजागर कर रहे एक पत्रकार पर 8 तारीख को हुए जानलेवा हमले के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह ठप है।
सबूत सामने हैं, आरोपी नामजद हैं, वीडियो में मौजूदगी का दावा है, फिर भी 10 दिन बीतने के बाद एक भी गिरफ्तारी नहीं।

नामजद आरोपी खुले, पुलिस खामोश

हमले के मामले में जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं, वे न सिर्फ खुलेआम घूम रहे हैं बल्कि पूरे क्षेत्र में माफिया नेटवर्क पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। न तो—

हमले में इस्तेमाल वाहन जब्त हुआ
न खनन में लगे उपकरणों पर कार्रवाई
न किसी आरोपी से पूछताछ की ठोस जानकारी

यह चुप्पी अब सवाल बन चुकी है—
कानून सो रहा है या साजिश में शामिल है?

हमले के बाद भी ब्लास्टिंग!
मैकल में माफिया का खुला एलान, सबसे सनसनीखेज तथ्य यह है कि पत्रकार पर हमले और जनआक्रोश के बावजूद 17 तारीख को फिर ब्लास्टिंग की गई। यानी माफिया ने साफ संदेश दे दिया—
“न रिपोर्टिंग रुकी, न हमारा कारोबार।”
मैकल बायोस्फियर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विस्फोट होना सीधे-सीधे पर्यावरण कानून, वन अधिनियम और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर तमाचा है।
सच दिखाने वाले को फंसाने की साजिश?

पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि माफिया पक्ष ने दबाव बनाने के लिए 10 तारीख को अमरकंटक थाने में काउंटर/झूठी एफआईआर दर्ज कराई, ताकि हमला झेलने वाला ही आरोपी बन जाए।

यह वही पुराना फार्मूला है—
० सच बोलो → अपराधी बना दो
० सवाल पूछो → केस ठोक दो

दो राज्यों की सीमा, एक माफिया साम्राज्य
मैकल क्षेत्र MP-CG सीमा पर फैला हुआ है। मामला अब सिर्फ एक थाने या एक जिले का नहीं रहा—
अवैध खनन
विस्फोटक ब्लास्टिंग
पत्रकारों पर हमले
पुलिस की निष्क्रियता

एक संगठित, संरक्षित और राजनीतिक रूप से ताकतवर माफिया नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं।

कई सवाल जवाब निरंक

जब आरोपी नामजद हैं तो गिरफ्तारी क्यों नहीं?
वीडियो सबूत के बावजूद जांच क्यों ठंडी?
बायोस्फियर क्षेत्र में ब्लास्टिंग किसके संरक्षण में?
काउंटर एफआईआर दर्ज करने की अनुमति किसने दी?
क्या माफिया कानून से ऊपर है?

अब मांग — शीर्ष स्तर की कार्रवाई

पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज की स्पष्ट मांग है—

MP और CG दोनों राज्यों के Chief Secretary स्तर पर जांच
तत्काल गिरफ्तारी और वाहन/मशीनरी जब्ती
मैकल क्षेत्र में अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध
पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा और न्याय

लोगों में चर्चा का विषय!
अगर नामजद हमलावर बेखौफ रहें, पत्रकार लहूलुहान हों, और माफिया खुलेआम पहाड़ उड़ा दे, तो यह सिर्फ कानून की विफलता नहीं, सुशासन के दावे का अंतिम संस्कार है। अब सवाल यही है, सरकार माफिया के साथ है या संविधान के?

पत्रकार पर हमले और माफियाराज के खिलाफ निर्णायक संघर्ष के संकेत
मैकल पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन, ब्लास्टिंग और पत्रकार पर हुए हमले के बाद अब आक्रोश आंदोलन में बदलता दिख रहा है। प्रशासन की चुप्पी और आरोपियों की बेखौफ मौजूदगी ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक पत्रकार संगठन, पर्यावरण कार्यकर्ता, आदिवासी समुदाय और स्थानीय नागरिक मिलकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।

सीमा पार उबाल — MP–CG दोनों राज्यों में हलचल
मैकल मामला अब दो राज्यों की सीमा तक फैल चुका है।
खबर है कि—

संयुक्त धरना
मशाल जुलूस
जिला-स्तरीय घेराव
और जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी चल रही है।

आंदोलन का केंद्रीय सवाल साफ है— “माफिया चलेगा या कानून?”


प्रशासन के लिए आख़िरी चेतावनी

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि—

नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
अवैध खनन-ब्लास्टिंग पर पूर्ण रोक
और काउण्टर केस करने वाले थानेदार की बर्खास्तगी
पत्रकार के खिलाफ FIR खारिज की मांग

नहीं दी गई, तो शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

SNT NEWS
Author: SNT NEWS

आपकी सोच से भी तेज Contact for news - advertisement 9131952416

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज