
बाँकी नहर बनी बाढ़ का कारण: अंबिकापुर के कई मोहल्लों में खतरे की घंटी, नागरिकों ने सौंपा कलेक्टर को ज्ञापन
HIGHLIGHT नागरिकों ने दी चेतावनी: नहर फटेगी या पहाड़ी धँसेगी! 40 साल पुरानी नहर, लेकिन रखरखाव नहीं।नवागढ़, मायापुर, श्रीगढ़, खैरबार* और महामाया मंदिर क्षेत्र के 500 से अधिक घरों के निवासी इस नहर की दुर्दशा और उपेक्षा से भयभीत एवं त्रस्त हैं।।

SHAIF FIRDOUSI SURGUJA
अंबिकापुर, सरगुजा। शहर के बीचों-बीच बहने वाली बाँकी डैम से निकली पुरानी नहर अब स्थानीय बस्तियों के लिए बाढ़ और आपदा* का कारण बन गई है। नवागढ़, मायापुर, श्रीगढ़, खैरबार* और *महामाया मंदिर* क्षेत्र के *500 से अधिक घरों के निवासी* इस नहर की दुर्दशा और उपेक्षा से *भयभीत एवं त्रस्त* हैं।
नागरिकों ने सोमवार को जिला कलेक्टर को स्थानीय पार्षद श्री हाजी अख्तर फ़िरदौसी चम्मा ने वार्ड वासियों के तरफ से एक गंभीर और तथ्यपरक ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्थिति को संभावित त्रासदी’ (Potential Disaster) बताया गया है और *तत्काल ड्रोन सर्वे, स्थलीय निरीक्षण व पूर्ण समाधान की मांग* की गई है।
40 साल पुरानी नहर, लेकिन रखरखाव नहीं ।

ज्ञापन के अनुसार, यह नहर करीब 40 वर्ष पहले बाँकी डैम से निकाली गई थी, ताकि आसपास के खेतों की सिंचाई की जा सके। लेकिन अब वह नहर *घनी आबादी के बीच से होकर गुजरती है*। पिछले कई वर्षों से न तो सिंचाई विभाग ने इसकी सफाई कराई, न ही नगर निगम ने इसे गंभीरता से लिया। दोनों विभाग इसे एक-दूसरे की ज़िम्मेदारी बताकर *साफ-साफ पल्ला झाड़ते रहे हैं*।

20 से अधिक अनियमित पाइप-पुल, गहराई में भारी अंतर
नहर पर *लगभग 20 से 30 पाइप पुल* बनाए गए हैं, जिनमें से कई अवैज्ञानिक, छोटे और अवरुद्ध हैं। *कहीं गहराई 20 फीट है, तो कहीं मात्र 5 फीट*, जिससे पानी रुका रहता है और बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है।
विशेष रूप से बरसात में पहाड़ से आने वाला पानी (जैसे महामाया पहाड़) इस नहर से होकर बहना चाहिए, परंतु जलनिकासी बंद होने से यह पानी सड़कों, नालियों और अंततः घरों में घुसने लगता है। यही कारण है कि *खरसिया रोड*, *कुंडला सिटी* जैसे क्षेत्रों में हर वर्ष भारी जलभराव होता है।
नागरिकों ने दी चेतावनी: नहर फटेगी या पहाड़ी धँसेगी!
ज्ञापन में नागरिकों ने प्रशासन को *खुली चेतावनी* दी है कि यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो –
नहर अधिक दबाव के कारण किसी स्थान पर फट सकती है*, जिससे आसपास की बस्तियाँ डूब सकती हैं,
* *महामाया पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन (Landslide)* की स्थिति उत्पन्न हो सकती है,
500 से अधिक मकान, कई स्कूल, धार्मिक स्थल और दुकानें* जलभराव की चपेट में आ सकती हैं।
रायपुर की तर्ज पर बने कैनाल लिंक रोड’ की मांग
स्थानीय नागरिकों ने केवल समस्या ही नहीं उठाई, बल्कि *एक रचनात्मक समाधान* भी प्रस्तुत किया है — कि इस पूरी नहर को पक्का करके *एक सुदृढ़ कैनाल लिंक रोड* में बदला जाए, जैसा *रायपुर शहर* में किया गया है। वहाँ वर्षों पुरानी नहर को बंद कर *शहर का एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग* तैयार किया गया है।

यदि अंबिकापुर में भी यही मॉडल अपनाया जाए, तो:
बाढ़ और गंदगी की समस्या से स्थायी छुटकारा मिलेगा,
शहर को एक नया *बायपास रोड* मिलेगा,
अतिक्रमण रोका जा सकेगा,
नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से की गई है सीधी अपील
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ के *मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*, *प्रभारी मंत्री श्री ओपी चौधरी*, *सांसद श्री चिंतामणि महाराज*, *विधायक श्री राजेश अग्रवाल* तथा *महापौर सुश्री मंजूषा भगत* सहित नगर निगम व सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।
नागरिकों ने मांग की है कि:
तत्काल ड्रोन सर्वे के माध्यम से choke-points की पहचान की जाए,
कलेक्टर या एसडीएम स्वयं *स्थलीय निरीक्षण* करें,
नगर निगम एवं सिंचाई विभाग को *संयुक्त कार्रवाई हेतु निर्देशित* किया जाए,
आपदा प्रबंधन विभाग को *अलर्ट मोड* पर रखा जाए।
नींद नहीं आती बारिश की रातों में” — नागरिकों की पीड़ा
एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हर बारिश के बाद हमारे बच्चों की कॉपियां बह जाती हैं, बर्तन तैरने लगते हैं। रात को नींद नहीं आती — डर लगा रहता है कि कहीं अगली सुबह हम अपने ही घर में डूबे न मिलें।”
यदि प्रशासन समय रहते कोई कदम नहीं उठाता, तो अंबिकापुर शहर में एक *बड़ी मानवीय त्रासदी* की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









