
नई दिल्ली
19.04.2025
सीबीआई ने छत्तीसगढ़ सरकार के तत्कालीन प्रमुख सचिव, तत्कालीन संयुक्त सचिव और तत्कालीन महाधिवक्ता समेत तीन आरोपियों के खिलाफ एक मामला पुनः पंजीकृत किया; नान और ईडी मामलों की चल रही कार्यवाही को प्रभावित करने के आरोपों पर जांच शुरू की और तलाशी ली
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक मामला दर्ज किया है, जो पहले थाना राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर (छत्तीसगढ़) में एफआईआर संख्या 49/2024 के रूप में दर्ज था। यह मामला भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार की अधिसूचना के अनुसार दर्ज किया गया है। यह मामला श्री अनिल टुटेजा, आईएएस (सेवानिवृत्त), तत्कालीन संयुक्त सचिव; डॉ. आलोक शुक्ला, आईएएस (सेवानिवृत्त), तत्कालीन प्रमुख सचिव; और श्री सतीश चंद्र वर्मा, तत्कालीन महाधिवक्ता, सभी छत्तीसगढ़ सरकार के विरुद्ध है। सीबीआई ने रायपुर में आरोपियों के दो स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं।
आरोप है कि उक्त लोक सेवकों ने नान प्रकरण (एफआईआर संख्या 9/2015) में, जो ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज किया गया था, और उस पर आधारित ईडी के मामले में, चल रही कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों के अनुसार, इन लोक सेवकों ने नान मामलों की कार्यवाही को बाधित करने के कई प्रयास किए।
इसके अतिरिक्त, आरोप है कि इन लोक सेवकों ने श्री सतीश चंद्र वर्मा, तत्कालीन महाधिवक्ता, छत्तीसगढ़ को अनुचित लाभ पहुंचाया ताकि वे अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का अनुचित ढंग से निर्वहन करें और ईडी और ईओडब्ल्यू/एसीबी, छत्तीसगढ़ द्वारा जांच किए जा रहे उपरोक्त मामलों में उनके लिए अग्रिम जमानत सुनिश्चित करा सकें।
आरोप यह भी है कि अग्रिम जमानत प्राप्त करने के लिए, आरोपियों ने राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों से संबंधित प्रक्रियात्मक और विभागीय कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में बदलाव करवाया और नान मामले में माननीय उच्च न्यायालय में दायर की जाने वाली उत्तर प्रतिवेदन में हेराफेरी की।
जांच जारी है।










