
“छत्तीसगढ़–आंध्र सीमा… 24 घंटे से गोलियों की गूंज… और जंगल की खामोशी को चीरती एक निर्णायक मुठभेड़।
आज इस घने मरेडमल्ली जंगल में, भारत की आंतरिक सुरक्षा के सबसे डरावने अध्याय का अंत लिखा गया है…

ग्रेहाउंड कमांडो ने बड़ा प्रहार किया है। अब तक 6 नक्सली ढेर।
सबसे अहम—बस्तर का सबसे कुख्यात चेहरा, सबसे खतरनाक गुरिल्ला कमांडर—माड़वी हिड़मा मारा गया है।
उसकी पत्नी राजक्का भी खत्म। और उसके चार सबसे भरोसेमंद लड़ाके भी।
इतिहास — क्यों है यह बड़ी खबर
हिडमा का नाम बस्तर के दो दशकों के सबसे खतरनाक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है — इनमें 2010 का ताड़मेटला/डांटेवाड़ा हमला (जहाँ लगभग 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे) और 2013 का झीरम घाटी/दर्भा हमला प्रमुख हैं। इसलिए सुरक्षा विशेषज्ञ और स्थानीय अधिकारी इसे बस्तर/त्रिजंक्शन की सुरक्षा पर बड़ा मोड़ बता रहे हैं।
छत्तीसगढ़–आंध्रप्रदेश सीमा से इस वक्त सबसे बड़ी ब्रेकिंग निकलकर सामने आ रही है।
मरेडमल्ली के घने जंगलों में पिछले 24 घंटों से गूंज रही गोलियों की आवाज आज एक निर्णायक मोड़ पर थम गई।
ग्रेहाउंड कमांडो ने अब तक 6 नक्सलियों को ढेर कर दिया है।
सबसे बड़ी हलचल—कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा और उसकी पत्नी राजक्का के मारे जाने की चर्चा ने पूरे बस्तर को हिला दिया है।
हालांकि पुलिस ने कहा है कि शवों की आधिकारिक पहचान जारी है, लेकिन घटनास्थल से मिले सुराग इस दावे को मजबूत कर रहे हैं।
बस्तर में हवा बदल गई है…
मुठभेड़ के बाद बस्तर के गांवों में जंगल कुछ अलग महसूस हो रहा है—
ज्यादा शांत, ज्यादा हल्का… जैसे कोई पुरानी अंधेरी परत उतर गई हो।
सालों से हिड़मा की तलाश में जुटे अफसर इस पल को
“बस्तर के आधुनिक इतिहास के सबसे खूनी अध्याय का अंत” बता रहे हैं।
दो दशक तक जंगल का ‘भूत’ था हिड़मा
करीब 20 साल तक बस्तर के जंगलों में एक ही नाम फुसफुसाया जाता था—
माड़वी हिड़मा।
गुरिल्ला वारफेयर का सबसे खतरनाक चेहरा सुरक्षा बलों की फाइलों में ‘मोस्ट वॉन्टेड’ माओवादी संगठन में जीवित किंवदंती भारत के सबसे रक्तरंजित हमलों का मास्टरमाइंड
उसकी पहचान थी—
क्रूरता + चतुराई + बच निकलने की पौराणिक क्षमता।
मंगलवार सुबह जब मरेडमल्ली जंगल का धुआँ साफ हुआ…
तो हिड़मा का अध्याय भी खत्म हो गया।
उसके साथ—
उसकी पत्नी राजक्का, और उसके चार भरोसेमंद लड़ाके भी मारे गए।
कौन था हिड़मा?
सुरक्षा एजेंसियों के दस्तावेज बताते हैं कि:
असली नाम: माड़वी हिड़मा अन्य नाम: हिडमालू, संतोष, देवा, विलास, अनिल उम्र: करीब 50 गांव: पुरवर्ती, थाना जगरगुंडा, सुकमा पत्नी: राजक्का, जो एएमओओएस (मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल) की प्रभारी भी थी पूरा परिवार नक्सल-प्रभावित इलाके में ही रहता है
ताडमेटला—जिसने हिड़मा को ‘दहशत’ बना दिया
इस ऑपरेशन की गंभीरता को समझने के लिए
2010 के ताडमेटला हमले में लौटना होगा।
76 सीआरपीएफ जवान शहीद जंगल ने मानो “एक पूरी बटालियन निगल ली थी” यही वह हमला था जिसने हिड़मा को देश के नक्शे पर उतारा यह सिर्फ हमला नहीं था— यह था एक नए नक्सली सरगना की ताजपोशी।
इसके बाद—
झीरम घाटी हमला, कई घातक एम्बुश…
हिड़मा धीरे-धीरे भारत का सबसे भयावह गुरिल्ला कमांडर बन गया।
क्या लड़ाई खत्म हो गई? नहीं।
एक्सपर्ट्स साफ कह रहे हैं:
“हिड़मा मरा है, लड़ाई नहीं।”
क्यों ?
यही इलाका ताडमेटला जैसी घटनाओं का केंद्र रहा यहीं झीरम घाटी कांड हुआ कई सक्रिय मॉड्यूल अभी भी फैले हैं जब तक इस entire corridor पर स्थायी नियंत्रण नहीं बनता तब तक नक्सल समस्या खत्म कहना जल्दबाज़ी होगी
Author: SNT NEWS
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