
13 सूत्रीय मांगों पर BMS का आर-पार का ऐलान, अब चक्काजाम की तैयारी
SECL भटगांव क्षेत्र में क्रमिक भूख हड़ताल लगातार जारी, 5 नवंबर के बाद कोल डिस्पैच बंद करने और चक्काजाम की चेतावनी; प्रबंधन की चुप्पी से श्रमिकों में बढ़ता आक्रोश
सूरजपुर/भटगांव:— एसईसीएल भटगांव क्षेत्र में श्रमिकों की लंबित समस्याओं और 13 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ (BMS) ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 27 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ आंदोलन लगातार जारी है। क्रमिक भूख हड़ताल के जरिए श्रमिक अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, लेकिन मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में अब आंदोलन को और उग्र करने की तैयारी है। संघ ने साफ चेतावनी दी है कि 5 नवंबर 2026 के बाद चक्काजाम किया जाएगा तथा कोल डिस्पैच बंद करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
भटगांव भूमिगत खदान क्रमांक 1 एवं 2 में CTO, FC और EC की लंबित अनुमतियों का शीघ्र निराकरण, संवेदनशील स्थानों पर कर्मचारियों की यथावत पदस्थापना सहित श्रमिक हितों से जुड़े 13 सूत्रीय मांग-पत्र को लेकर इस आंदोलन का शंखनाद किया गया है। कंपनी सुरक्षा समिति सदस्य संजय सिंह की उपस्थिति में आंदोलन की शुरुआत हुई। प्रथम दिवस उपमहामंत्री दिलीप मंडल एवं क्षेत्रीय जेसीसी (वैकल्पिक) सदस्य हरेंद्र सिंह ने क्रमिक भूख हड़ताल की कमान संभाली।
संघ की 13 सूत्रीय मांगों में भटगांव UG-1 एवं UG-2 खदानों की CTO, FC एवं EC संबंधी लंबित अनुमतियों का शीघ्र निराकरण, महामाया एवं मदन नगर ओसीपी को प्रारंभ करने की प्रक्रिया पूरी करना, कर्मचारियों की पदस्थापना एवं पदोन्नति, रिक्त पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) आयोजित करना, कार्यस्थलों पर पेयजल एवं बिजली की समुचित व्यवस्था, अवकाश रोस्टर में पारदर्शिता, लंबित भुगतान तथा अन्य सेवा संबंधी समस्याओं का निराकरण शामिल है।
संघ ने प्रबंधन को 13 सूत्रीय मांगों पर ठोस एवं संतोषजनक कार्रवाई के लिए 15 दिनों की समय-सीमा देते हुए प्रत्येक मांग पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी मांगी है। इसके बावजूद यदि प्रबंधन की ओर से केवल आश्वासन मिलते रहे और जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी रहीं, तो आंदोलन का अगला चरण और अधिक प्रभावी होगा।

श्रमिकों का सवाल है कि जब उनकी समस्याएं लंबे समय से प्रबंधन के संज्ञान में हैं, तो फिर उनके निराकरण में इतनी देरी क्यों? आखिर कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए भूख हड़ताल और चक्काजाम जैसे कदम उठाने की नौबत क्यों आ रही है?
अब 5 नवंबर के बाद चक्काजाम और कोल डिस्पैच बंद करने की चेतावनी ने एसईसीएल प्रबंधन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यह आंदोलन केवल मांगों की सूची तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि श्रमिकों के अधिकार, सम्मान, पदोन्नति और कार्यस्थल की सुविधाओं से जुड़ा सवाल बन चुका है। अब गेंद प्रबंधन के पाले में है। देखना होगा कि प्रबंधन समय रहते बातचीत और ठोस निर्णय का रास्ता अपनाता है या फिर उसकी उदासीनता आंदोलन को और व्यापक रूप देगी।












