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बिजली व्यवस्था वेंटिलेटर पर! 50% से ज्यादा पद खाली, मेंटेनेंस ठप होने से बढ़ा हादसों का खतरा संघ ने सीएम को लिखा पत्र

बिजली व्यवस्था वेंटिलेटर पर! 50% से ज्यादा पद खाली, मेंटेनेंस ठप होने से बढ़ा हादसों का खतरा
छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने सीएम को लिखा पत्र; सरगुजा न्यूज टुडे से चर्चा में बोले प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरजीत गुप्ता– “कर्मचारियों की भारी कमी से व्यवस्था संभालना हुआ मुश्किल।”

रायपुर/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ में चरमराती बिजली व्यवस्था और लगातार होते अघोषित पावर कट के पीछे एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में बिजली आपूर्ति की रीढ़ कहे जाने वाले तकनीकी (लाइन) कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पूरी व्यवस्था ढहने की कगार पर पहुंच गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने सीधे सूबे के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की गई, तो प्रदेश की विद्युत वितरण व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
आंकड़े चौंकाने वाले: आधे से अधिक पद खाली
संघ द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में जो आंकड़े सामने आए हैं  वे बेहद डराने वाले हैं। प्रदेश में लाइन स्टाफ के कुल 12,317 स्वीकृत पद हैं, लेकिन धरातल पर सिर्फ 5,747 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। यानी 6,570 पद खाली पड़े हैं। लगभग 53 प्रतिशत से ज्यादा तकनीकी पद रिक्त होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है।
सरगुजा न्यूज टुडे’ से बोले प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरजीत गुप्ता: “मेंटेनेंस करना हुआ नामुमकिन”
इस पूरे संकट पर ‘सरगुजा न्यूज टुडे’ के संपादक सैफ फिरदौसी से खास चर्चा करते हुए संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरजीत कुमार गुप्ता ने जमीनी हकीकत बयां की। उन्होंने बेहद चिंता जताते हुए कहा:
“कर्मचारियों की कमी से फील्ड पर परेशानियां इस कदर बढ़ गई हैं कि बिजली का रूटीन मेंटेनेंस करना भी अब नामुमकिन सा हो गया है। रिक्त पदों की वजह से जो गंभीर समस्याएं खड़ी हो रही हैं, उसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। स्टाफ न होने से छोटे-मोटे फॉल्ट को सुधारने में भी घंटों लग रहे हैं।”

लंबे पावर कट से जनता बेहाल: लाइन फॉल्ट और ब्रेकडाउन सुधार कार्यों में भारी देरी हो रही है, जिससे जनता को घंटों बिना बिजली के रहना पड़ रहा है।
बढ़ रहा है हादसों का खतरा: नियमित मेंटेनेंस (रखरखाव) न होने के कारण तकनीकी खामियां बढ़ रही हैं, जिससे ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और आम जनता के लिए दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
स्मार्ट प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक: कर्मचारियों के टोटे के कारण सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे- स्मार्ट मीटरिंग, समय पर इंस्टॉलेशन, मॉनिटरिंग और ई-सेवाओं का संचालन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
शीघ्र भर्ती की मांग, आंदोलन की सुगबुगाहट
संघ के प्रांतीय महासचिव इंजी. दीपक कुमार निकुंज ने सरकार से दोटूक मांग की है कि रिक्त पड़े सभी तकनीकी पदों पर बिना देरी किए तत्काल प्रभाव से नियमित भर्ती की जाए। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि राज्य की विद्युत सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को भी सुधारा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि इस तकनीकी स्टाफ की कमी को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे सीधे तौर पर शासन की योजनाओं और उपभोक्ता सेवाओं की साख दांव पर लग जाएगी।

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Author: SNT NEWS

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