
कपसरा में हाथी का तांडव: धान की रखवाली कर रहे दंपति की दर्दनाक मौत
सरगुजा न्यूज़ टुडे ब्यूरो चीफ सूरजपुर राजेश गुप्ता
आधी रात की चीखें, सुबह का मातम, चार बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
सूरजपुर/भटगांव:— वन परिक्षेत्र सूरजपुर और जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत कपसरा के बिशाही नवापारा पोंडी में बीती रात जंगली हाथी ने कहर ढाते हुए एक दंपति को कुचलकर मार डाला। गांव में यह घटना भय और आक्रोश का माहौल छोड़ गई है। मृतकों की पहचान काविलास पिता हुबलाल (40 वर्ष) और धनियारों (38 वर्ष) के रूप में हुई है।
रात 2 बजे का हमला, धान का पहरा दे रहे थे पति–पत्नी
सूत्रों के अनुसार, घटना रात लगभग 2 बजे हुई, जब दोनों पति-पत्नी घर के बाहर रखे धान की रखवाली कर रहे थे। अचानक पहुंचे हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी भयावह थी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हो गई, किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
अनाथ हुए चार बच्चे, पूरे गांव में मातम
दंपति अपने पीछे तीन पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी, जिससे दर्द और चिंता दोनों बढ़ गए हैं। गांव में शोक और दहशत का माहौल पसरा हुआ है।

ग्रामीणों की कड़ी नाराज़गी, क्या अब गांव में रहना मौत को बुलाना है ?
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को आड़े हाथों लिया। उनका आरोप है कि विभाग को हाथियों के विचरण की कोई समय रहते जानकारी नहीं होती। हाथियों की गतिविधियों पर न निगरानी है, न चेतावनी तंत्र। विभाग की भूमिका सिर्फ हादसे के बाद मुआवजा बांटने तक सीमित रह गई है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि अगर हाथी गांव में घुसकर लोगों को मार रहे हैं, तो हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
*अधिकारियों का दौरा, लेकिन समाधान अब भी दूर*
घटना की जानकारी मिलते ही सुबह पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े, जिला पंचायत सदस्य अनुज राजवाड़े, तहसीलदार शिवनारायण राठिया, थाना प्रभारी सरफराज फिरदौसी और संबंधित वन विभाग रेंजर मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रक्रिया पूरी की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण और कागजी कार्रवाई से समस्या हल नहीं होती।
*सबसे बड़ा सवाल, कब बनेगी ग्रामीण सुरक्षा की मजबूत योजना?*
लगातार बढ़ रहे हाथी–मानव संघर्ष के बीच ग्रामीणों का डर बढ़ता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं क्या गांवों में रहने वाले लोगों के लिए कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनेगी? क्या हाथियों के मूवमेंट पर समय से चेतावनी देने वाला अलर्ट सिस्टम शुरू होगा? क्या वन विभाग संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रि गश्त और निगरानी बढ़ाएगा?
जब तक इन सवालों का ठोस जवाब नहीं मिलता, भय और आक्रोश दोनों ग्रामीणों के मन में कायम रहेंगे।


Author: Shaif firdousi
KTUJM से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की उपाधि प्राप्त !









